बिहार के मधुबनी में पत्रकार की निर्मम हत्या और शराब पर सरकार की हाई लेवल मीटिंग
बिहार के मधुबनी में पत्रकार की निर्मम हत्या और शराब पर सरकार की हाई लेवल मीटिंग
अपराधी बेलगाम, सरकार बेजुबान 

बिहार | मधुबनी में निडर और निष्पक्ष पत्रकार अविनाश झां, को मौत के घाट उतारा गया है। पत्रकार अविनाश झा की लड़ाई जनहित में स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले नर्सिंग होम माफियाओं से थी। अविनाश आरटीआई कार्यकर्ता भी थे। नर्सिंग होम माफियाओं में अविनाश की कलम खौफ बनी हुई थी। हड़कंप मचा हुआ था। ताजा कार्रवाई के तहत दो नर्सिंग होम को बंद कराने का निर्देश भी पत्रकार झां की  देन थी। पर शायद अविनाश समझ नहीं पाए, तभी तो निष्पक्ष पत्रकारिता की कीमत कलम के सिपाही को जान देकर चुकानी पड़ गई। निष्पक्ष पत्रकार अविनाश अब दुनिया में नहीं रहे, अखबारों में अब अविनाश के हत्या पर दुख प्रकट किया जाएगा।

शासन सत्ता के लोग न्याय की बातों से पत्रकार के परिजनों का जख्म भरेंगे। बस कुछ दिनों बाद जैसे सैकड़ों पत्रकारों की फाइल बंद हो जाती है। वैसे ही हत्या की यह फाइल के लिए भी कहीं किसी तिजोरी में जगह खाली पड़ी होगी। अफसोस है अविनाश आपकी बारी आ गई, मगर जिंदा रहकर आपने कलम के मान को घटने नहीं दिया, जिस पत्रकारिता पर आपने जान निछावर कर दिया, उस वीरता को हम चंद आंसुओं की बूंदों से तौल कर कलंकित नहीं कर सकते। इसलिए जिस निष्पक्षता की भेंट आप चढ़े हैं।

शान से उस निष्पक्षता को बरकरार रखते हुए, उसकी भेंट चढ़ने को कई अविनाश जिंदा है, और जिंदा रहेंगे। इसलिए कल किसकी बारी है कुछ कहा नहीं जा सकता। सुशासन बाबू की सरकार न्याय दिलाने में माहिर है। हत्या, हत्या पर हत्या, जांच, जांच पर जांच, बाद में बड़े मंचों पर यह कहना कि कानून का राज है। ऐसे ही विश्वास के बल सरकार चलती है। अच्छी बात है शराब की लड़ाई लड़ीये, विश्वास को जिंदा रखिए, अभी बिहार में एक हाई लेवल मीटिंग हुई थी। मामला गंभीर था नया आदेश आया है। शराब बिकी तो थानेदार नपेंगे, पुलिस कर्मियों की नौकरी जाएगी और जा भी रही है।

अपराधी अपराध और सरकार शराब पर जोर दिए हुए हैं। कभी किसी संगीन वारदात पर हाई लेवल मीटिंग बुलाने की खबर शायद जोर पकड़ती, पर ऐसी नौबत सरकार के मुताबिक नहीं आई है। सरकार की लाज मतलब आपकी लाज शराब बचाएगी, और आप बिहार की लाज बचाने में लगे हैं लगे रहिए मगर बिहार में स्थिति लाइलाज हो रही है जान लीजिए। बिहार में जो लगा है, इससे अब यही लगता है कि अपराधी बेलगाम है। सुशासन बाबू  बेजुबान है। खैर कोई बात नहीं, पाठकों से विशेष अनुरोध है कि आपको निष्पक्ष पत्रकार ही तो चाहिए, आप बिल्कुल चिंता ना करें, इसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। खबर तो आपको मिल ही जाएगी, भले कितने भी पत्रकार मौत के घाट उतारे जाएं। जो आपके लिए मारे गए उनकी भी लंबी कतार हैं। और जो निष्पक्षता के लिए मरने को तैयार है उनकी भी लंबी कतार है। मैं भी अभी जिंदा हूँ।

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