ब्लैडर कैंसर से जंग जीतने वालों का सम्मान, मणिपाल हॉस्पिटल ने कोलकाता में आयोजित किया ‘ब्लैडर कैंसर चैंपियंस मीट’
कोलकाता। ब्लैडर कैंसर अवेयरनेस मंथ के अवसर पर मणिपाल हॉस्पिटल, ईएम बाइपास की ओर से कोलकाता के ऐतिहासिक इंडियन म्यूज़ियम में “ब्लैडर कैंसर चैंपियंस मीट” का आयोजन किया गया। इस खास कार्यक्रम में ब्लैडर कैंसर से जंग जीत चुके मरीज, उनके परिजन, डॉक्टर और देखभाल करने वाले लोग एक मंच पर जुटे और अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों में ब्लैडर कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में मणिपाल हॉस्पिटल के डायरेक्टर यूरोलॉजी एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी डॉ. अभय कुमार, इंडियन म्यूज़ियम के डायरेक्टर डॉ. सायन भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कैंसर सर्वाइवर्स ने अपने संघर्ष, इलाज और नई जिंदगी की कहानी साझा कर लोगों को भावुक कर दिया।
डॉ. अभय कुमार ने कहा कि भारत में ब्लैडर कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2026 में देश में करीब 25 से 26 हजार नए मामलों के सामने आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों का पता देर से चलता है, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और रोबोटिक सर्जरी के जरिए अब इलाज पहले से अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो गया है।
उन्होंने बताया कि मणिपाल हॉस्पिटल ने वर्ष 2023 में ब्लैडर कैंसर सपोर्ट ग्रुप की शुरुआत की थी, जहां मरीज और सर्वाइवर्स नियमित रूप से मिलकर अपने अनुभव साझा करते हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हैं। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रम मरीजों के मन से डर और भ्रम दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इंडियन म्यूज़ियम के डायरेक्टर डॉ. सायन भट्टाचार्य ने कहा कि अब म्यूज़ियम केवल ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संवेदनशील मुद्दों पर संवाद का माध्यम भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर सर्वाइवर्स की कहानियां समाज को साहस और उम्मीद का संदेश देती हैं।
कार्यक्रम में ब्लैडर कैंसर सर्वाइवर तपस कर्मकार ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्हें मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर का पता चला था। कीमोथेरेपी और सर्जरी के कठिन दौर से गुजरने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर इलाज और परिवार के सहयोग से कैंसर जैसी बीमारी को हराया जा सकता है।
वहीं, 62 वर्षीय महिला सर्वाइवर सोमा दास ने कहा कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉयड जैसी समस्याओं के बावजूद उन्होंने रोबोटिक सर्जरी और नियमित इलाज के जरिए कैंसर को मात दी। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैडर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय रहते इलाज कराना बेहद जरूरी है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और कैंसर मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं।
