सुपर अल नीनो का खतरा! इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से तप सकता है भारत
देशभर में इस साल भीषण गर्मी को लेकर चिंता बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार सामान्य अल नीनो नहीं, बल्कि ‘सुपर अल नीनो’ बनने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो भारत में गर्मी, हीटवेव और कमजोर मानसून के कई पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
आखिर क्या होता है अल नीनो?
‘अल नीनो’ प्रशांत महासागर में होने वाला एक मौसमी बदलाव है। सामान्य स्थिति में समुद्र का गर्म पानी एशिया की ओर रहता है, जबकि दक्षिण अमेरिका के पास पानी ठंडा रहता है। लेकिन जब ट्रेड विंड्स कमजोर पड़ जाती हैं, तब गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की ओर लौटने लगता है। इससे समुद्र का तापमान बढ़ जाता है और मौसम का संतुलन बिगड़ने लगता है।
भारत में क्यों बढ़ती है गर्मी?
अल नीनो के दौरान भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे मानसून कमजोर होता है और बारिश कम होती है। आसमान साफ रहने से सूरज की गर्मी सीधे धरती पर पड़ती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। उत्तर भारत, राजस्थान, दिल्ली, यूपी और मध्य भारत में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।
क्या है सुपर अल नीनो?
जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार समुद्र तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे सुपर अल नीनो की आशंका बढ़ गई है।
पहले भी दिख चुका है असर
1982, 1997 और 2015 में सुपर अल नीनो जैसी स्थिति देखने को मिली थी। इन वर्षों में दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड गर्मी, सूखा और मौसम में बड़े बदलाव दर्ज किए गए थे।
ग्लोबल वॉर्मिंग से बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग पहले ही पृथ्वी का तापमान बढ़ा चुकी है। ऐसे में अगर सुपर अल नीनो सक्रिय हुआ तो गर्मी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
अगर सुपर अल नीनो बनता है, तो देश में मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। साथ ही लंबे समय तक हीटवेव चलने की आशंका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल गर्मी कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकती है और धरती भट्टी जैसी महसूस हो सकती है।