कब है धनतेरस, कब जलेंगे दीप? जानिए 2026 की दीपावली से भाई दूज तक की पूरी तारीखें

रोशनी के पर्व का काउंटडाउन शुरू, दो महीने बाद जगमगाएगी काशी
 
पांच दिनों तक काशी में दीपोत्सव की धूम, जानें कब होगी धनतेरस और भाई दूज

वाराणसी। रोशनी, उल्लास और समृद्धि का पर्व दीपावली अब दो महीने दूर है। वर्ष 2026 में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी और 10 नवंबर को भाई दूज के साथ पर्व का समापन होगा। मुख्य दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की पूजा की जाएगी। काशी में दीपावली के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन के साथ महाकाली पूजा की भी विशेष परंपरा है।

भारतीय परंपरा में दीपावली को प्रकाश और शुभता का पर्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर अमावस्या की अंधेरी रात को रोशन किया था। इसी परंपरा के चलते दीपावली का पर्व सदियों से उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

पर्व के करीब आते ही बाजारों में भी रौनक बढ़ने की उम्मीद है। दीप, सजावटी सामान, बिजली की झालर, पूजन सामग्री और अन्य सामानों की मांग बढ़ने के साथ कारोबारियों की तैयारियां भी तेज होंगी। दुकानदार दीपावली को लेकर अपने प्रतिष्ठानों में माल जुटाने की तैयारी में लगेंगे।

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8 नवंबर को मनेगी मुख्य दीपावली


वर्ष 2026 में कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। अमावस्या और प्रदोषकाल के संयोग को देखते हुए मुख्य दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी।

लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं प्रदोषकाल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, धन कुबेर और हनुमानजी की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन करेंगे। कई परिवारों में नई खरीदी गई प्रतिमाओं के साथ पुरानी प्रतिमाओं का भी परंपरागत तरीके से पूजन किया जाएगा।

मान्यता है कि दीपावली की रात शुभ मुहूर्त में किए गए पूजन से घर में सुख-समृद्धि और शुभता का वास होता है। श्रद्धालु इस अवसर पर विशेष मंत्र-जाप और साधना भी करते हैं।

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काशी में दीपावली की अलग धार्मिक परंपरा


काशी में दीपावली का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहां लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ विभिन्न मंदिरों में देवी-देवताओं के दर्शन और विशेष पूजन-अर्चन की परंपरा है। काशी के बंगीय समाज में महाकाली पूजा का विशेष महत्व है।

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव का आयोजन होगा। काशी के विभिन्न मंदिरों में भगवान को विविध प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर अन्नकूट सजाया जाएगा। इसी दिन सोमवती अमावस्या का भी संयोग रहेगा। इस कारण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहने की संभावना है।

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पांच दिनों में ऐसे चलेगा दीपोत्सव


6 नवंबर, शुक्रवार — धनतेरस और धन्वंतरि जयंती
 

पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि की जयंती भी मनाई जाएगी। परंपरा के अनुसार धनतेरस पर खरीदारी को शुभ माना जाता है।

7 नवंबर, शनिवार — छोटी दीपावली/नरक चतुर्दशी


इस दिन छोटी दीपावली मनाई जाएगी। घरों में दीप जलाने के साथ धार्मिक अनुष्ठान होंगे।

8 नवंबर, रविवार — मुख्य दीपावली


लक्ष्मी-गणेश और कुबेर पूजन होगा। काशी में हनुमानजी के दर्शन-पूजन के साथ बंगीय समाज की ओर से महाकाली पूजा भी की जाएगी। शाम से घरों और बाजारों में दीप जलाए जाएंगे।

9 नवंबर, सोमवार — गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और सोमवती अमावस्या


दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। इसी दिन सोमवती अमावस्या का भी पर्व रहेगा।

10 नवंबर, मंगलवार — भाई दूज


पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई दूज से होगा। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक कर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी।