साइबर अपराधियों पर वाराणसी पुलिस का बड़ा प्रहार, एक साल में 59 गिरोहों का पर्दाफाश, 283 गिरफ्तार
वाराणसी। साइबर अपराध और संगठित ऑनलाइन ठगी के खिलाफ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने बीते एक वर्ष में बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के तहत पुलिस ने 59 संगठित साइबर गिरोहों का पर्दाफाश करते हुए 283 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस दौरान ठगी के लिए संचालित किए जा रहे 15 फर्जी कॉल सेंटरों का भी खुलासा किया गया। पुलिस की कार्रवाई में करोड़ों रुपये की ठगी की रकम को होल्ड कराने के साथ ही पीड़ितों को बड़ी धनराशि वापस दिलाई गई।
पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई की गई। इसमें निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर ठगी करने, सरकारी अधिकारी बनकर विदेशी नागरिकों को डराने और नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को निशाना बनाने वाले गिरोह शामिल रहे।
डिजिटल अरेस्ट और सिम-बॉक्स नेटवर्क का खुलासा
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया। सामनेघाट के एकता नगर और कैलाशपुरी क्षेत्र में संचालित अवैध सिम-बॉक्स सेटअप पर छापेमारी कर 32 पोर्ट क्षमता वाले छह सिम-बॉक्स बरामद किए गए। इनमें कुल 192 सिम स्लॉट थे। मौके से राउटर, गेटवे, वाई-फाई कैमरे समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
12 हजार से अधिक शिकायतों का निस्तारण, करोड़ों रुपये बचाए
साइबर ठगी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर प्राप्त 12,282 शिकायतों का निस्तारण किया। पुलिस के अनुसार, इस दौरान 28.30 करोड़ रुपये की ठगी की रकम होल्ड कराई गई, जबकि 5.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए। इसके अलावा साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे 10,876 मोबाइल नंबर और 9,462 IMEI नंबर ब्लॉक कराए गए।
अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 21 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। वहीं, साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसे 550 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए गए 17 चारपहिया वाहनों को भी बरामद किया।
48 हजार से अधिक लोगों को किया जागरूक
साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई के साथ जनजागरूकता अभियान भी चलाया। स्कूलों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और विभिन्न शिविरों के माध्यम से 48 हजार से अधिक लोगों को साइबर ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। इस दौरान पंपलेट और जागरूकता पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में 47.02 प्रतिशत कमी का दावा
पुलिस के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के मुकाबले वर्ष 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की धनराशि में 47.02 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, होल्ड या लियन कराई गई रकम में 55.6 प्रतिशत और पीड़ितों को वापस दिलाई गई धनराशि में 73.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 219 एफआईआर भी दर्ज की गईं।
दो बड़े मामलों में 1.65 करोड़ रुपये से अधिक होल्ड
अक्टूबर 2026 में साइबर क्राइम सेल और संबंधित थानों की टीमों ने दो बड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए कुल 1 करोड़ 65 लाख 54 हजार रुपये होल्ड कराए। सिगरा थाना क्षेत्र में पेट्रोल पंप की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 1.10 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 75.77 लाख रुपये होल्ड कराए।
वहीं, भेलूपुर थाना क्षेत्र में शेयर बाजार में निवेश के नाम पर एक डॉक्टर से 2.99 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया। पुलिस ने संबंधित बैंकों और साइबर अपराध समन्वय केंद्र से संपर्क कर 89.77 लाख रुपये होल्ड कराए।
बेहतर काम करने वाले पुलिसकर्मियों को मिलेगी प्राथमिकता
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर क्राइम पुलिस और संबंधित टीमों को कार्रवाई और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस का लक्ष्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि संगठित साइबर गिरोहों, फर्जी कॉल सेंटरों और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करना भी होना चाहिए।
उन्होंने तकनीकी दक्षता, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और जटिल मामलों के खुलासे में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने की बात कही। ऐसे कर्मठ पुलिसकर्मियों को भविष्य में थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व सौंपने में प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, बैंक खाते या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।