Varanasi News: 25 साल में बदली काशी की तस्वीर, फ्लाईओवर से रोपवे तक विकास की नई कहानी

Varanasi News: बीते 25 वर्षों में काशी में फ्लाईओवर, पुल, सड़कों और रोपवे जैसी परियोजनाओं से जबरदस्त विकास हुआ है। जानें कैसे बदली वाराणसी की तस्वीर।
 

वाराणसी। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी ने बीते 25 वर्षों में विकास की एक नई गाथा लिखी है। कभी संकरी सड़कों और सीमित संसाधनों के लिए पहचानी जाने वाली काशी आज आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सुविधाओं से लैस होती जा रही है।

ढाई दशक पहले जहां शहर में एक भी फ्लाईओवर नहीं था, वहीं आज काशी में सात बड़े फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) तैयार हो चुके हैं। इनमें चौकाघाट, फुलवरिया, पुलिस लाइन फ्लाईओवर के साथ मंडुवाडीह, कज्जाकपुरा और ककरमत्ता आरओबी शामिल हैं। इन परियोजनाओं ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को काफी हद तक सुगम बनाया है।

सड़कों के विस्तार में भी जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जहां शहर में कुल 1924 किलोमीटर सड़क नेटवर्क था, वह अब बढ़कर 4548 किलोमीटर तक पहुंच चुका है। रिंग रोड और सिक्स लेन सड़कों के निर्माण से भारी वाहनों का दबाव शहर के अंदर से कम हुआ है, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर हुई है।

गंगा नदी पर पुलों की संख्या भी बढ़ी है। पहले केवल राजघाट पुल ही काशी को जोड़ता था, लेकिन अब सामनेघाट, बलुआ और विश्वसुंदरी पुल जैसे नए विकल्प उपलब्ध हैं। आने वाले समय में पूर्वांचल का पहला सिग्नेचर ब्रिज भी काशी की पहचान बनने जा रहा है।

सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। काशी को जल्द ही रोपवे सेवा की सौगात मिलने वाली है, जो शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। करीब 80,700 लाख रुपये की लागत से 3.75 किलोमीटर लंबे रोपवे नेटवर्क पर काम तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही स्काई वॉक और डमरू के आकार की सिग्नेचर बिल्डिंग जैसी परियोजनाएं शहर को आधुनिक पहचान देंगी।

धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी काशी ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिला है।

स्वच्छता व्यवस्था में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है। वर्ष 2000 के आसपास जहां कूड़ा उठाने के लिए भैंसा गाड़ियों का इस्तेमाल होता था, वहीं अब आधुनिक कॉम्पैक्टर मशीनों से सफाई की जा रही है। शहर की निगरानी के लिए सीसीटीवी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनी है।

रेलवे सेवाओं में भी भारी वृद्धि हुई है। पहले जहां वाराणसी के कैंट स्टेशन से करीब 30 ट्रेनें संचालित होती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 70 से अधिक हो गई है। इनमें आधुनिक वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनें भी शामिल हैं, जिससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिला है।

गंगा नदी में नौकायन की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 25 साल पहले जहां लगभग 100 नावें ही संचालित होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 4000 के पार पहुंच गई है। इसके साथ ही क्रूज सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जो पर्यटन को नई दिशा दे रही हैं।

कुल मिलाकर, काशी ने परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए विकास की नई मिसाल पेश की है। आने वाले वर्षों में जारी परियोजनाएं इस प्राचीन नगरी को और अधिक आधुनिक और विश्वस्तरीय शहर के रूप में स्थापित करेंगी।