वाराणसी एयरपोर्ट बना ड्रग तस्करों का निशाना, एक हफ्ते में दूसरी बड़ी बरामदगी

 
तीर्थयात्रा की आड़ में ड्रग्स तस्करी का खुलासा, वाराणसी एयरपोर्ट पर करोड़ों की खेप बरामद
 

वाराणसी। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर पर कस्टम विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बैंकॉक से आए छह थाई नागरिकों को लगभग 19.70 करोड़ रुपये मूल्य के हाइड्रोपोनिक गांजा (वीड) के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद मादक पदार्थ का कुल वजन करीब 19.7 किलोग्राम बताया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट संख्या IX-215 से बैंकॉक से वाराणसी पहुंचे यात्रियों की जांच के दौरान यह सफलता मिली। एडवांस पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (APIS) के विश्लेषण के आधार पर इमिग्रेशन अधिकारियों को कुछ विदेशी यात्रियों की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। इसके बाद कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) ने सात थाई यात्रियों के समूह को रोककर उनके सामान की गहन जांच और एक्स-रे स्कैनिंग कराई।

जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि तस्करों ने ट्रॉली बैग की निचली सतह को काटकर उसमें बड़ी मात्रा में हाइड्रोपोनिक गांजा छिपा रखा था। छह यात्रियों के सामान से यह प्रतिबंधित नशीला पदार्थ बरामद किया गया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वयं को धार्मिक पर्यटक बताते हुए जांच एजेंसियों को गुमराह करने का प्रयास किया। उन्होंने अपने मोबाइल फोन में सारनाथ स्थित बौद्ध स्तूपों की तस्वीरें दिखाकर दावा किया कि वे तीर्थयात्रा के उद्देश्य से भारत आए हैं। हालांकि, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी दलीलें टिक नहीं सकीं।

गौरतलब है कि बाबतपुर एयरपोर्ट पर एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी ड्रग्स बरामदगी है। इससे पहले 23 मई को भी बैंकॉक से आए मध्य प्रदेश के एक युवक और युवती को करोड़ों रुपये मूल्य के हाइड्रोपोनिक गांजे के साथ गिरफ्तार किया गया था। वहीं मार्च माह में भी गुजरात के तीन यात्रियों को इसी तरह की तस्करी के आरोप में पकड़ा गया था।

बैंकॉक से वाराणसी आने वाली उड़ानों के माध्यम से लगातार सामने आ रहे तस्करी के मामलों ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया विभागों की चिंता बढ़ा दी है। कस्टम विभाग ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।

अब जांच एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के नेटवर्क, स्थानीय संपर्कों तथा उस व्यक्ति या गिरोह की तलाश में जुटी हैं, जिसे वाराणसी में यह खेप सौंपी जानी थी। अधिकारियों का मानना है कि मामले की गहन जांच से तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।