बीमार पति के इलाज से शुरू हुई कहानी, 50 करोड़ की जमीन तक पहुंचा विवाद! भाजपा नेता समेत 10 लोगों पर एफआईआर 

वाराणसी के मोहनसराय में करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने के आरोप में भाजपा नेता सहित 10 लोगों पर न्यायालय के आदेश से FIR दर्ज हुई है। मामले में अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
 

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा, पत्नी का आरोप- इलाज, भरोसे और फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों की संपत्ति पर कर लिया कब्जा

वाराणसी। वाराणसी में करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन और संपत्ति को लेकर सामने आया विवाद अब पुलिस जांच का विषय बन गया है। रोहनिया थाना क्षेत्र की रहने वाली प्रमिला मिश्रा की शिकायत पर न्यायालय के आदेश के बाद भाजपा काशी क्षेत्र के उपाध्यक्ष सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

 

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके बीमार पति की गंभीर बीमारी का फायदा उठाकर पहले परिवार का विश्वास जीता गया, फिर इलाज के नाम पर उन्हें परिवार से अलग-थलग किया गया और अंततः करोड़ों रुपये की संपत्ति अपने नाम कराने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया। 

 

एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता के पति ओमप्रकाश मिश्रा लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी उम्र लगभग 65 वर्ष बताई गई है और उन्हें सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराना पड़ता था।

उनका बेटा अभिषेक मिश्रा चिकित्सक है और नौकरी के सिलसिले में बाहर रहता है, जिसके कारण इलाज के दौरान घर के बाहर के कुछ लोगों की आवाजाही बढ़ गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसी परिस्थिति का आरोपियों ने लाभ उठाया। 

शिकायत में कहा गया है कि परिवार के परिचित विशाल मिश्रा, घरेलू चालक रवि उपाध्याय और अन्य लोग डायलिसिस के दौरान लगातार साथ रहने लगे। धीरे-धीरे अस्पताल ले जाने, वापस लाने और इलाज से जुड़े निर्णयों में उनकी भूमिका बढ़ती चली गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान उनके पति को परिवार से दूर रखने का प्रयास किया गया और उनके ऊपर आरोपियों का प्रभाव बढ़ता गया। 

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इलाज के खर्च, आयुष्मान कार्ड और बेहतर चिकित्सा सुविधा दिलाने का भरोसा देकर कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी दौरान बैंकिंग व्यवस्था में भी बदलाव किए गए।

उनके अनुसार, पति के खाते से मोबाइल नंबर बदल दिया गया, नया सिम सक्रिय कराया गया और परिवार को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। इससे बैंक से आने वाली सूचनाएं भी परिवार के बजाय अन्य लोगों तक पहुंचने लगीं। 

शिकायत के अनुसार, विवाद की जड़ मोहन्सराय क्षेत्र में स्थित लगभग 70 बिस्वा भूमि है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है। यह जमीन मुख्य सड़क पर स्थित है और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आरोप है कि इसी बहुमूल्य संपत्ति पर कब्जा करने के उद्देश्य से पूरी योजना तैयार की गई। 

एफआईआर में 7 अप्रैल 2026 की घटनाओं का विशेष उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस दिन डायलिसिस कराने के बहाने उनके पति को अस्पताल ले जाया गया। इलाज पूरा होने के बाद उन्हें सीधे गंगापुर स्थित उपनिबंधक कार्यालय ले जाया गया, जहां उनकी शारीरिक स्थिति सामान्य न होने के बावजूद संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण कराया गया। शिकायत में कहा गया है कि उसी दिन कई दस्तावेजों के माध्यम से करोड़ों रुपये की जमीन का हस्तांतरण कराया गया। 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब पति घर लौटे और परिवार को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली, तब रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर जानकारी जुटाई गई। वहां से कथित रूप से यह पता चला कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण हो चुका है। इसके बाद परिवार ने पूरे मामले की जांच शुरू की और इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए पुलिस व प्रशासन के समक्ष शिकायत की। 

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण शिकायतकर्ता ने पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों से भी गुहार लगाई, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। न्यायालय के आदेश के बाद रोहनिया थाने में मामला दर्ज किया गया। 

मुकदमे में भाजपा काशी क्षेत्र के उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह, विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, करुणापति उपाध्याय, नितेश राय उर्फ सोनू, अजय कुमार तिवारी, प्रवीण कुमार सिंह, प्रशांत कुमार सिंह, तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार और निबंधन कार्यालय के लिपिक सत्यांशु सिंह को नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी ने आपसी मिलीभगत से पूरी साजिश को अंजाम दिया। 

पुलिस ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर में किए गए बदलाव, इलाज से संबंधित अभिलेख और सभी नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जाएगी। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई होगी। 


यह समाचार न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सभी नामजद आरोपी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तथा दोष सिद्ध होने तक कानून की नजर में निर्दोष हैं।