हादसों का इंतजार क्यों? चाइनीज मांझे की बिक्री पर सालभर हो सख्ती

चाइनीज मांझे पर सालभर सख्ती से रोक लगाने की मांग, छात्राओं ने चलाया जागरूकता अभियान

 

 

 

वाराणसी। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर सालभर प्रभावी रोक लगाने की मांग को लेकर बुधवार को मैदागिन स्थित श्री हरिश्चंद्र बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज में जनजागरूकता अभियान चलाया गया। मछोदरी स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर के महंत संत स्वामी प्रेम स्वरूप दास के आह्वान पर सामाजिक संस्था सुबह-ए-बनारस क्लब के बैनर तले आयोजित इस अभियान में छात्राओं को चाइनीज मांझे के खतरों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही उनसे अपने भाइयों और आसपास के लोगों को इस प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रेरित करने की अपील की गई।

 

 

 

कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष एवं समाजसेवी मुकेश जायसवाल तथा कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. प्रियंका तिवारी ने कहा कि पतंग उड़ाने का शौक सदियों पुराना है, लेकिन चाइनीज मांझे के इस्तेमाल ने इसे जानलेवा बना दिया है। इसकी चपेट में आने से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल ही में कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर साड़ी कारोबारी सुनील कुमार गुजराती की गर्दन में चाइनीज मांझा फंसने से हुई मौत ने एक बार फिर इस खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरत को उजागर किया है।

 

 

वक्ताओं ने कहा कि किसी दुर्घटना के बाद प्रशासन की ओर से छापेमारी और धरपकड़ की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुछ समय बाद प्रतिबंधित मांझे की बिक्री फिर शुरू हो जाती है। यदि पूरे साल नियमित रूप से निगरानी, छापेमारी और कार्रवाई की जाए तो इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चाइनीज मांझे का इस्तेमाल दूसरों की जान को खतरे में डालने वाला कृत्य है। पतंग उड़ाने के शौकीनों को मानवता और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधित मांझे का त्याग कर सुरक्षित, स्वदेशी विकल्प अपनाना चाहिए।

 

अभियान के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की उपलब्धता लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ बेजुबान पशु-पक्षियों की जान पर भी खतरा बना रहता है। ऐसे में केवल दुर्घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय इसकी बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर लगातार प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।

 

कार्यक्रम में मुकेश जायसवाल, डॉ. प्रियंका तिवारी, श्याम दास गुजराती, ललित गुजराती, बी.डी. टकसाली सहित कॉलेज की सैकड़ों छात्राएं शामिल रहीं।