स्थानांतरण आदेश के विरोध में एकजुट हुए व्यवसायी, 22 जुलाई को बंद रहेंगी 15 मंडियां
वाराणसी। नगर निगम द्वारा मीट एवं मछली विक्रेताओं को शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने संबंधी आदेश के विरोध में सोमवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों के व्यवसायियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में नगर निगम के निर्णय का विरोध करते हुए इसे प्रभावित व्यापारियों की आजीविका पर प्रतिकूल असर डालने वाला बताया गया और आदेश वापस लेने की मांग की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 22 जुलाई को वाराणसी में एक दिवसीय सांकेतिक दुकान बंदी की जाएगी। इस दौरान शहर की लगभग 15 प्रमुख मंडियों में मीट एवं मछली की दुकानें बंद रखकर व्यवसायी शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
व्यवसायियों का कहना है कि नगर निगम ने प्रभावित व्यापारियों से संवाद, सर्वेक्षण अथवा वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना यह निर्णय लिया है। उनके अनुसार, इससे वर्षों से वैध रूप से व्यवसाय कर रहे अनेक परिवारों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही आम उपभोक्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि व्यवसायी कानून और प्रशासन का सम्मान करते हैं, लेकिन आजीविका को प्रभावित करने वाले किसी भी एकतरफा निर्णय का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। उन्होंने नगर निगम और जिला प्रशासन से आदेश पर पुनर्विचार करते हुए व्यवसायी प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
मीट एवं मछली व्यवसायी प्रतिनिधियों ने शहरवासियों से 22 जुलाई की सांकेतिक दुकान बंदी का समर्थन करने की अपील की है।
बैठक में प्रमुख रूप से राघवेंद्र चौबे, संजीव सिंह, मोहम्मद अंसार, धनंजय त्रिपाठी, सुमित सोनकर, रामजन्म, नीति, मनीष शर्मा, दिनेश चौहान, नवाब, अंसार, किशन यादव, जितेंद्र कुमार, सिराज तथा शेरू सहित अन्य व्यवसायी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।