काशी में 3 से 5 नवंबर तक जुटेंगे तीन हजार संत, संस्कृति संसद में Gen Z के सवालों पर होगा मंथन
वाराणसी। भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नई पीढ़ी की बदलती सोच के बीच संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से काशी में छठी संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। तीन से पांच नवंबर तक रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशभर से करीब तीन हजार संतों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। आयोजन में संतों और विद्वानों के साथ युवाओं, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों तथा कलाकारों की भी भागीदारी होगी।
इस बार संस्कृति संसद में जेन जी यानी नई पीढ़ी के विचारों और सवालों को विशेष स्थान दिया जाएगा। युवा सम्मेलन के प्रस्तावित वक्ताओं में 90 प्रतिशत युवा और 10 प्रतिशत विशेषज्ञ होंगे। भाषण, तथ्यपरक प्रस्तुतियों, परिचर्चा और सवाल-जवाब के माध्यम से युवा संस्कृति, राष्ट्र, सामाजिक मूल्यों और समकालीन चुनौतियों से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखेंगे।
परंपरा और आधुनिक सोच के बीच संवाद पर जोर
गंगा महासभा की ओर से अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में आयोजित संस्कृति संसद का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक-सामाजिक मूल्यों पर व्यापक विमर्श करना है। आयोजन के माध्यम से पारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक पीढ़ी की सोच के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्य सभागार में सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक संत, विद्वान, वैज्ञानिक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। वहीं, युवा सम्मेलन में नई पीढ़ी को अपने अनुभव, तर्क और प्रश्न सामने रखने का अवसर मिलेगा।
शाम को होगा संस्कृति उत्सव
संस्कृति संसद में वैचारिक सत्रों के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित होगा। इसमें राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और संस्कार से जुड़े विषयों पर युवा कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी।
इसके साथ चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता और बच्चों की चित्रकला जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति और कला से जुड़ी अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
राम, कृष्ण और शिव की भूमि पर दिखेगी कला की झलक
आयोजन के तहत ‘राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर, संरक्षण, संवर्धन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इनका आयोजन शिंजो आबे कला दीर्घा में किया जाएगा। प्रदर्शनी के माध्यम से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और कला परंपराओं को सामने लाने का प्रयास होगा।
रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों एवं अन्य प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इस तरह संस्कृति संसद में वैचारिक चर्चा के साथ कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को भी प्रमुखता दी जाएगी।
पत्रकार वार्ता में साझा की गई रूपरेखा
संस्कृति संसद की जानकारी देने के लिए आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती, जगद्गुरु बालक देवाचार्य, श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी, गंगा महासभा के महामंत्री संगठन गोविंद शर्मा और आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश आचार्य उपस्थित रहे। युवा विमर्श के प्रभारी आदेश भट्ट और युवा सम्मेलन के संयोजक नागेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
तीन दिवसीय संस्कृति संसद में संत समाज, विद्वानों और युवाओं को एक साझा मंच पर लाने की योजना है। आयोजन के जरिए भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी के विचारों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़कर संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।