बदलते मौसम में बढ़ा बीमारियों का खतरा, बुखार को न करें नजरअंदाज

बुखार को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, डेंगू-मलेरिया और स्वाइन फ्लू का हो सकता है खतरा
 
बदलते मौसम में वाराणसी के अस्पतालों में बढ़े सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज, चिकित्सकों ने जांच के बाद इलाज कराने की दी सलाह

वाराणसी। बदलते मौसम के बीच शहर में सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सकों ने लोगों को बुखार को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है। समय पर जांच और उचित उपचार नहीं मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। बुखार मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू या स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है।

एसएसपीजी मंडलीय चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. शशि भूषण उपाध्याय के अनुसार, वर्तमान मौसम में वायरल संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों में नाक बहना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और बुखार जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। कई बीमारियों के लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी का अनुमान लगाकर स्वयं इलाज शुरू करना उचित नहीं है।

दो प्रमुख अस्पतालों में 615 मरीजों का उपचार

रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी के मंडलीय चिकित्सालय और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय में सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित 615 मरीजों का उपचार किया गया। इनमें से 50 गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ा। चिकित्सकों के मुताबिक, वायरल बुखार के साथ मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। बारिश के बाद जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है, जिससे डेंगू और मलेरिया के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।

बदलते तापमान और सुबह-शाम की ठंड का असर सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों पर भी पड़ रहा है। विशेष रूप से अस्थमा के मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीजों को अपनी निर्धारित दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

सफाई और मच्छरों से बचाव जरूरी

चिकित्सकों ने घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी है। कूलर, गमलों, टंकियों और अन्य पात्रों में पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और आसपास जलभराव होने पर उसे हटाने की व्यवस्था करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं तथा संतुलित आहार लें।

बुखार आने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए। विशेष रूप से केवल बुखार कम करने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच कराकर ही उपचार कराएं। यदि बुखार लगातार बना रहे, तेज सिरदर्द हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल अस्पताल में संपर्क करें।

चिकित्सकों का कहना है कि समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। इसलिए बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना और लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करना जरूरी है।