काशी के लोलार्क कुंड का रहस्य, लोलार्क छठ पर संतान की कामना लेकर जुटते हैं दंपती
काशी के लोलार्क कुंड का रहस्य, लोलार्क छठ पर संतान की कामना लेकर जुटते हैं दंपती
वाराणसी। काशी के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल लोलार्क कुंड सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। भदैनी क्षेत्र में स्थित इस कुंड को लेकर मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी लोलार्क छठ के दिन यहां स्नान करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में दंपती संतान सुख की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं।
लोलार्क कुंड के संबंध में कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि लोलार्क छठ के दिन कुंड में स्नान करने से नि:संतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा चर्म रोग से मुक्ति के लिए भी श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाते हैं। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाता है।
कुंड के ऊपर स्थित लोलार्केश्वर महादेव मंदिर भी इस धार्मिक स्थल की विशेष पहचान है। मान्यता है कि भगवान सूर्य ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी। धार्मिक कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि सूर्य की पहली किरण लोलार्क कुंड के जल पर पड़ती है।
सूर्य के रथ से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान सूर्य के रथ का पहिया गिरा था, जिसके बाद यहां कुंड का निर्माण हुआ। इसी वजह से इसे सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है। लोलार्क कुंड का उल्लेख काशी के प्राचीन धार्मिक स्थलों में मिलता है और इसका इतिहास गुप्तकाल से जोड़ा जाता है।
बताया जाता है कि नौवीं शताब्दी में गहरवार वंश के शासक द्वारा कुंड का जीर्णोद्धार कराया गया था। बाद में 18वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसका पुनर्निर्माण कराया। वर्तमान में कुंड का जो स्वरूप दिखाई देता है, उसमें इस पुनर्निर्माण की छाप देखने को मिलती है।
लोलार्क छठ पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
लोलार्क छठ के अवसर पर लोलार्क कुंड और आसपास के क्षेत्र में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और कुंड में स्नान कर लोलार्केश्वर महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं। खासतौर पर संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह स्थान विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
स्थानीय पुजारी कुंदन त्रिपाठी के अनुसार, लोलार्क कुंड में स्नान की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालु यहां संतान प्राप्ति और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। यही धार्मिक आस्था इस प्राचीन कुंड को काशी के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।