रोपवे के सफर में दिखेगी काशी की संस्कृति, स्टेशनों पर उकेरी जा रही धार्मिक आकृतियां
वाराणसी। काशी में आकार ले रहा नगरीय परिवहन रोपवे अब महज आवागमन का आधुनिक साधन नहीं रहेगा, बल्कि इसके स्टेशन शहर की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान के जीवंत केंद्र के रूप में भी नजर आएंगे। रोपवे स्टेशनों के फसाड और दीवारों पर काशी की प्राचीन परंपरा, धार्मिक प्रतीकों और ऐतिहासिक विरासत को कलात्मक रूप में उकेरा जा रहा है। यहां गाय, गंगा, त्रिशूल और डमरू जैसे धार्मिक प्रतीकों के साथ सारनाथ की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती भगवान बुद्ध की आकृतियां भी दिखाई देंगी।
स्टेशनों की वास्तुकला में चुनार के बलुआ पत्थर का विशेष इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर की जा रही बारीक नक्काशी काशी की प्राचीन इमारतों और मंदिरों की स्थापत्य शैली की याद दिलाएगी। पत्थरों पर उकेरी जा रही कलाकृतियों में काशी की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ यहां की पारंपरिक हस्तकला की भी झलक देखने को मिलेगी। इसके अलावा स्टेशनों की दीवारों और फसाड पर गंगा तथा काशी के ऐतिहासिक घाटों को भी कलात्मक रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।
डिजाइन में समाहित होगी काशी की पहचान
वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि रोपवे के स्टेशनों और गंडोला के डिजाइन में काशी की विशिष्ट पहचान को समाहित किया जा रहा है। सभी स्टेशनों पर शहर की परंपरा, हस्तकला, अध्यात्म, संगीत और धार्मिक विरासत की झलक दिखाई देगी। प्रमुख मंदिरों की स्थापत्य शैली को भी स्टेशन के डिजाइन का हिस्सा बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्टेशनों पर लगाए जा रहे चुनार के बलुआ पत्थर पर की गई नक्काशी काशी की प्राचीन इमारतों की स्थापत्य शैली के अनुरूप तैयार की जा रही है। इससे आधुनिक तकनीक से विकसित हो रहा रोपवे काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा नजर आएगा।
कैंट से गोदौलिया तक होंगे पांच स्टेशन
कैंट से गोदौलिया के बीच रोपवे के पांच स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें कैंट रोपवे स्टेशन, विद्यापीठ स्टेशन, रथयात्रा स्टेशन, गोदौलिया गिरजाघर स्टेशन और गोदौलिया स्टेशन शामिल हैं। परियोजना के पहले सेक्शन के तीनों स्टेशनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे सेक्शन में गोदौलिया स्टेशन तक निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
हर डेढ़ से दो मिनट में मिलेगा गंडोला
रोपवे का संचालन शुरू होने के बाद कैंट से गोदौलिया के बीच यात्रियों को करीब डेढ़ से दो मिनट के अंतराल पर गंडोला उपलब्ध कराने की योजना है। एक दिशा में प्रति घंटे लगभग 3,000 यात्री और दोनों दिशाओं में करीब 6,000 यात्री सफर कर सकेंगे। गोदौलिया से कैंट रेलवे स्टेशन तक की दूरी रोपवे के जरिए लगभग 16 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
परियोजना के तहत कुल 148 ट्रॉली कार संचालित करने की योजना है। प्रत्येक ट्रॉली में 10 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। रोपवे का प्रतिदिन करीब 16 घंटे संचालन प्रस्तावित है। आधुनिक परिवहन सुविधा के साथ काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जोड़ने की यह पहल शहर आने वाले पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।