वंदे भारत की कमान संभालकर श्रीनी श्रीवास्तव ने रचा इतिहास, अब बुलेट ट्रेन चलाने का सपना

गाजीपुर की बेटी ने रेलवे में बनाई अलग पहचान, वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत के संचालन में निभाई अहम भूमिका
 

वाराणसी। भारतीय रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच गाजीपुर की श्रीनी श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत, लगन और तकनीकी दक्षता के दम पर खास पहचान बनाई है। पूर्वोत्तर रेलवे की पहली महिला लोको पायलट के रूप में वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से जुड़ी श्रीनी अब वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के परिचालन दल में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनका सफर पूर्वांचल की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गया है।

मूल रूप से गाजीपुर जिले के सरैया छावनी की निवासी श्रीनी श्रीवास्तव के पिता पंकज श्रीवास्तव लोक निर्माण विभाग में अमीन रहे हैं। श्रीनी ने सुल्तानपुर स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा किया। इसके बाद रेलवे में नौकरी पाने के लिए प्रयास शुरू किए। तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 10 अप्रैल 2017 को पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर में सहायक लोको पायलट के पद पर नौकरी हासिल की।

ट्रेनिंग के बाद वंदे भारत के संचालन की मिली जिम्मेदारी

रेलवे में अपनी कार्यकुशलता और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर श्रीनी ने अधिकारियों का विश्वास हासिल किया। बाद में गोरखपुर से स्थानांतरण लेकर वाराणसी आईं। यहां वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद उन्हें वर्ष 2023 में शुरू हुई चेयरकार वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन की जिम्मेदारी मिली।

वंदे भारत के संचालन में उनकी भूमिका ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। नौ जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे शपथ ग्रहण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होने का अवसर भी मिला।

अब बुलेट ट्रेन चलाने की है इच्छा

31 अक्टूबर को वाराणसी से नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के उद्घाटन के दौरान श्रीनी को इसके परिचालन दल में जिम्मेदारी मिली। अब उनका सपना बुलेट ट्रेन चलाने का है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में बुलेट ट्रेन के संचालन का अवसर मिलता है तो वह इसे अपने लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि मानेंगी।

बेटियों को रेलवे में आगे आने का संदेश

श्रीनी श्रीवास्तव का मानना है कि इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि सहायक लोको पायलट की नौकरी गर्व की बात है, क्योंकि इसमें यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

ट्रेन संचालन के दौरान हॉर्न, मीटर, सिग्नल और गति पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है। इसके लिए एकाग्रता और सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण है। श्रीनी के अनुसार रेलवे में महिलाओं के लिए सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो रही हैं तथा अधिकारी भी प्रोत्साहित करते हैं।

श्रीनी श्रीवास्तव की उपलब्धि यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से बेटियां उन क्षेत्रों में भी सफलता का परचम लहरा सकती हैं, जिन्हें कभी पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था।