विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ, काशी को मिली वैश्विक पहचान
वाराणसी। उत्तर प्रदेश और देश के लिए गर्व के क्षण में वाराणसी स्थित प्राचीन बौद्ध तीर्थ सारनाथ को यूनेस्को ने विश्व धरोहर (World Heritage) सूची में शामिल कर लिया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में यह घोषणा की गई। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही सारनाथ भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बन गया है।
यह घोषणा यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की बैठक के दौरान की गई, जिसका आयोजन 19 से 29 जुलाई तक दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में हुआ। इसकी औपचारिक जानकारी यूनेस्को मुख्यालय, पेरिस से जारी की गई।
सारनाथ का चयन उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि माना जा रहा है। इससे पहले वाराणसी को यूनेस्को की क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में सिटी ऑफ म्यूजिक का दर्जा मिल चुका है। अब सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से काशी की पहचान वैश्विक स्तर पर बौद्ध विरासत और सांस्कृतिक धरोहर के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाला है।
बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ
सारनाथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहीं भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। इसी कारण यह स्थान विश्वभर के करोड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चिंतन का केंद्र माना जाता है।
सारनाथ में स्थित धम्मेक स्तूप, चौखंडी स्तूप, अशोक स्तंभ, प्राचीन बौद्ध विहारों के अवशेष तथा सारनाथ संग्रहालय भारतीय इतिहास, कला और बौद्ध संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। सम्राट अशोक द्वारा विकसित यह क्षेत्र भारतीय पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
पर्यटन और विकास को मिलेगा बढ़ावा
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, हस्तशिल्प, परिवहन और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। साथ ही ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।
यूनेस्को में भारत के राजदूत ने जताया आभार
यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत विशाल वी. शर्मा ने विश्व धरोहर केंद्र का आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि "सारनाथ दुनिया भर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए चिंतन और प्रेरणा का केंद्र है। यह सत्य की खोज, अहिंसा, जागरूक जीवनशैली और समावेशी समाज के निर्माण का संदेश देता है। सारनाथ के आदर्श यूनेस्को के शांति और वैश्विक सहयोग के मिशन से गहराई से जुड़े हैं।"
भारत की विश्व धरोहर संपत्तियां
सारनाथ के शामिल होने के साथ भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है। इनमें 37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक तथा 1 मिश्रित विश्व धरोहर स्थल शामिल हैं। यह भारत की समृद्ध, विविध और ऐतिहासिक विरासत का वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रमाण है।