सारनाथ को ताजमहल से भी बड़ा पर्यटन केंद्र बनने की क्षमता, यूनेस्को राजदूत ने दिए विकास के सुझाव
वाराणसी। यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत विशाल वी. शर्मा ने कहा कि सारनाथ में विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल होने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यदि यहां आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए तो सारनाथ में आने वाले पर्यटकों की संख्या आगरा के ताजमहल से भी अधिक हो सकती है।
सोमवार को सारनाथ के पुरातात्विक उत्खनित स्थल परिसर में विश्व धरोहर पट्टिका का अनावरण करने के बाद राजदूत ने इंटरप्रेटेशन सेंटर, संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थलों का विस्तृत निरीक्षण किया। यूनेस्को की 48वीं विश्व धरोहर समिति के सत्र में सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद यह भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बन गई है।
निरीक्षण के दौरान राजदूत शर्मा ने कहा कि सारनाथ विश्वभर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक चिंतन का प्रमुख केंद्र है। यह पावन भूमि युवाओं को सत्य, अहिंसा, सजग जीवनशैली और समावेशी समाज निर्माण की प्रेरणा देती है।
सारनाथ संग्रहालय में उन्होंने भारत के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के चार सिंह शीर्ष, धर्मचक्र, भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं, चुनार के बलुआ पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन नक्काशी तथा ऐतिहासिक अवशेषों का अवलोकन किया। धमेख स्तूप की बारीक शिल्पकला की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के अभाव में उस काल में इतनी उत्कृष्ट कारीगरी भारतीय शिल्प परंपरा की अद्वितीय मिसाल है।
राजदूत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों को ग्रीन नर्सरी क्षेत्र में आधुनिक मेडिटेशन सेंटर विकसित करने का सुझाव दिया। साथ ही भगवान बुद्ध के चक्रमण स्थल पर स्पष्ट पदचिह्न विकसित करने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्याख्यात्मक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
करीब 2500 वर्ष पुरानी प्राचीन जल निकासी प्रणाली को देखकर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने इसकी ऐतिहासिक और तकनीकी महत्ता को देखते हुए वहां विस्तृत सूचना पट्ट लगाने का निर्देश दिया, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस प्राचीन अभियांत्रिकी से परिचित हो सकें।
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की खुशी में स्थानीय संस्थाओं ने राजदूत विशाल वी. शर्मा का नागरिक अभिनंदन भी किया। राष्ट्रीय फेरी पटरी ठेला व्यवसायी महासंघ ने उन्हें लकड़ी से निर्मित अशोक स्तंभ की प्रतिकृति और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया, जबकि सारनाथ टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर उनका अभिनंदन किया।