रोजगार और कौशल विकास पर फोकस, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने खोले प्रवेश के द्वार
वाराणसी। बदलते समय में युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक अभ्यर्थी 30 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पत्रकारिता एवं जनसंचार विज्ञान स्नातकोत्तर (एमजेएमसी) तथा पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विज्ञान स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावसायिक और व्यावहारिक कौशल से भी सुसज्जित करना है।
सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य युवाओं को रोजगार, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी है, वहीं पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विज्ञान भारतीय संस्कृति और इतिहास के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किए गए इन पाठ्यक्रमों में प्रायोगिक प्रशिक्षण, शोध आधारित अध्ययन और कौशल विकास को विशेष महत्व दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को मीडिया, जनसंपर्क, डिजिटल कम्युनिकेशन, संग्रहालय, अभिलेखागार और शोध संस्थानों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
प्रवेश के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह पहल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
प्रो. मिश्र ने कहा कि रोजगारपरक शिक्षा ही आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला है और विश्वविद्यालय इसी सोच के साथ विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।