वाराणसी में रोपवे का इंतजार खत्म होने की ओर, हुक टेस्टिंग के बाद होगा ट्रायल
Varanasi News: वाराणसी में बहुप्रतीक्षित अर्बन रोपवे परियोजना के दूसरे चरण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। रथयात्रा से गोदौलिया के बीच रोपवे की हुक टेस्टिंग और सुरक्षा जांच का काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, टेस्टिंग पूरी होने के बाद अगस्त के अंत तक रोपवे का ट्रायल रन शुरू किए जाने की तैयारी है। ट्रायल के दौरान 148 गंडोला का लोड रोप पर डालकर इसकी क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी।
रथयात्रा-गोदौलिया रूट पर सुरक्षा जांच जारी
रोपवे परियोजना के दूसरे चरण में रथयात्रा से गोदौलिया के बीच विभिन्न तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। हुक टेस्टिंग पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल सफल रहने के बाद ही रोपवे को यात्रियों के लिए शुरू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि रोपवे में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के साथ यूरोपीय मानकों के अनुरूप तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कैंट से गोदौलिया तक 3.8 किलोमीटर का सफर
काशी में शुरू की गई यह परियोजना पर्वतमाला प्रोजेक्ट के तहत विकसित की जा रही है। प्रस्तावित अर्बन रोपवे वाराणसी कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक करीब 3.8 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इसके बीच काशी विद्यापीठ और रथयात्रा इंटरमीडिएट स्टेशन होंगे, जबकि गिरजाघर को तकनीकी स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
पूरे रूट पर कुल पांच स्टेशन और 29 टावर बनाए जा रहे हैं। परियोजना की कुल लागत करीब 815.58 करोड़ रुपये है। इसमें 15 वर्षों के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की व्यवस्था भी शामिल है।
बिजली जाने पर भी नहीं रुकेगी व्यवस्था
रोपवे के संचालन और निगरानी के लिए आधुनिक कंट्रोल रूम तैयार किया गया है। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जनरेटर की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा वैकल्पिक आंतरिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है, ताकि आपात स्थिति में रोपवे संचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं प्रभावित न हों।
ट्रायल के बाद आम यात्रियों को मिलेगी सुविधा
रोपवे का ट्रायल सफल होने और सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद इसे आम जनता के लिए शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। परियोजना के पूरा होने से कैंट से गोदौलिया के बीच आवागमन को आसान बनाने के साथ शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। काशी आने वाले पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों के लिए भी यह परिवहन का नया विकल्प साबित होगा।