गंगा में राहत, वरुणा में आफत! चेतावनी बिंदु पर पहुंचा पानी
वाराणसी। गंगा के जलस्तर में लगातार तीसरे दिन गिरावट के बीच वरुणा नदी का पानी चेतावनी बिंदु तक पहुंच गया है। बुधवार को केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार गंगा का जलस्तर 67.97 मीटर और वरुणा का जलस्तर 70.21 मीटर दर्ज किया गया। वरुणा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के बराबर पहुंचने से नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। पानी का बढ़ाव फिलहाल स्थिर बताया जा रहा है, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों में जलभराव और आवागमन से जुड़ी परेशानियां बनी हुई हैं।
वरुणा नदी के किनारे रहने वाले कई परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि कई परिवार घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ लोग किराये के मकानों में शिफ्ट हो गए हैं। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से राहत और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि जलस्तर बढ़ने के बावजूद उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है।
तीन साल से अगस्त के अंतिम सप्ताह में घट रहा जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन वर्षों में गंगा के जलस्तर में एक समान रुझान देखने को मिला है। अगस्त के पहले और दूसरे सप्ताह में जलस्तर तेजी से बढ़ता है, जबकि महीने के अंतिम सप्ताह में इसमें गिरावट शुरू हो जाती है।
आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2023 के अंतिम सप्ताह में गंगा का जलस्तर 64.76 मीटर दर्ज किया गया था। वर्ष 2024 में यह 66.96 मीटर और 2025 में 67.86 मीटर रहा। इस वर्ष भी अगस्त के अंतिम सप्ताह में गंगा के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी है। हालांकि, वरुणा के चेतावनी बिंदु तक पहुंचने से नदी किनारे के इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
तटवर्ती इलाकों में बढ़ी परेशानी
गंगा के घटते जलस्तर से जहां राहत की उम्मीद जगी है, वहीं वरुणा के चेतावनी बिंदु तक पहुंचने से तटवर्ती इलाकों में चिंता बरकरार है। वरुणा के किनारे बसे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव, आवागमन और दैनिक जरूरतों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री, सुरक्षित ठिकाने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभागों की नजर गंगा और वरुणा दोनों नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जलस्तर में होने वाला बदलाव तटवर्ती इलाकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।