करसड़ा के कूड़े के पहाड़ से मिलेगी राहत, बायोमाइनिंग से बदलेगी तस्वीर! 25 एकड़ में विकसित होगा सघन वन
वाराणसी। काशीवासियों के लिए राहत भरी खबर है। करसड़ा स्थित डंपिंग ग्राउंड में पिछले एक दशक से जमा कूड़े के पहाड़ से शहर को जल्द मुक्ति मिलने जा रही है। नगर निगम वाराणसी ने मंगलवार से वैज्ञानिक तकनीक के जरिए कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। महापौर अशोक कुमार तिवारी ने परियोजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि अगले डेढ़ वर्ष में यह स्थान कूड़े के ढेर की जगह एक सघन हरित वन के रूप में नजर आएगा।
12.64 लाख मीट्रिक टन कचरे का होगा निस्तारण
महापौर ने बताया कि करसड़ा डंपिंग ग्राउंड में लगभग 10 वर्षों से करीब 12.64 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दुर्गंध, प्रदूषण और गंदगी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
नगर निगम ने इस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 53.15 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत “बायोमाइनिंग” तकनीक के जरिए कूड़े की छंटाई कर उसका सुरक्षित निस्तारण किया जाएगा।
कूड़े के ढेर की जगह बनेगा मियावाकी जंगल
नगर निगम ने योजना बनाई है कि कचरा हटने के बाद खाली होने वाली करीब 25 एकड़ जमीन पर जापान की प्रसिद्ध मियावाकी तकनीक से सघन वन विकसित किया जाएगा।
इससे न केवल शहर का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और आबोहवा में भी सुधार आएगा। यह क्षेत्र भविष्य में एक हरित पट्टी और पर्यावरण अनुकूल जोन के रूप में विकसित होगा।
“आज नफरत, कल मिलेगा सुकून” : दयाशंकर मिश्र
कार्यक्रम में मौजूद आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि जो लोग आज इस कूड़े के पहाड़ से परेशान हैं, वही आने वाले समय में यहां बने हरित उद्यान में सुकून महसूस करेंगे।
उन्होंने कहा कि वाराणसी में अब कूड़े से चारकोल और बिजली बनाने जैसे कार्य भी सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।
“भविष्य की पीढ़ियों के लिए बनेगी स्वच्छ धरोहर”
जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या ने कहा कि फिलहाल इस क्षेत्र में दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या है, लेकिन यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित धरोहर साबित होगी।
ड्रोन से होगी निगरानी
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि वाराणसी में प्रतिदिन 1200 से 1300 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसका शत-प्रतिशत निस्तारण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि “इको स्टैन इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड” कंपनी द्वारा विशेष “क्लीमैन मशीन” और आधुनिक तकनीक की मदद से बायोमाइनिंग का कार्य किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी।
कार्बन क्रेडिट से होगी अतिरिक्त आय
नगर आयुक्त के अनुसार इस परियोजना से नगर निगम को भविष्य में कार्बन क्रेडिट के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की भी संभावना है।उन्होंने कहा कि यह परियोजना “स्वच्छ काशी-सुंदर काशी” अभियान की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
कार्यक्रम का संचालन अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र ने किया। इस दौरान उपसभापति नरसिंह दास, सुरेश चौरसिया, प्रवीन राय, अमरदेव यादव, कुसुम पटेल, सीमा वर्मा, विवेक जायसवाल, हनुमान प्रसाद सहित बड़ी संख्या में पार्षद और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।