चीनी मांझे पर छापेमारी तेज!...फिर भी आखिर थोक कारोबारियों तक क्योंनहीं पहुंच रहे पुलिस के हाथ...

 

चीनी मांझे पर छापेमारी, छोटे दुकानदार गिरफ्तार, थोक कारोबारियों तक कब पहुंचेगी पुलिस?

वाराणसी। चीनी मांझे से साड़ी कारोबारी की मौत के बाद वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में चीनी मांझा बरामद किया गया। हालांकि, कार्रवाई के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रतिबंधित मांझे की आपूर्ति करने वाले बड़े थोक कारोबारियों और इसके नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है।

 

पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अभियान के दौरान आठ थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की गई। इस दौरान नौ आरोपियों की गिरफ्तारी और कुल 137.448 किलोग्राम प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद होने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में की गई कार्रवाई में दशाश्वमेध, कोतवाली, भेलूपुर, मंडुवाडीह, सारनाथ, लोहता और लालपुर-पांडेयपुर समेत अन्य क्षेत्र शामिल रहे। रामनगर में बलुआ घाट के किनारे लावारिस हालत में भी मांझा बरामद किया गया।

 

अंबियामंडी में 37 किलो से अधिक मांझा बरामद

कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 11 अक्टूबर की रात अंबियामंडी क्षेत्र में छापेमारी कर मो. जुल्फेकार अहमद (28) और शकील अहमद (30) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, दोनों के कब्जे से 37.873 किलोग्राम प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद हुआ। इस मामले में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इसके अलावा दशाश्वमेध क्षेत्र में 56 किलोग्राम और भेलूपुर में 10 किलोग्राम मांझा बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। अन्य थाना क्षेत्रों में भी कार्रवाई कर प्रतिबंधित मांझे की खेप जब्त की गई।

 

फुटकर दुकानदारों पर कार्रवाई, थोक सप्लाई पर सवाल

चीनी मांझे के खिलाफ लगातार हो रही छापेमारी के बावजूद इसकी आपूर्ति के स्रोतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि फुटकर दुकानदारों तक प्रतिबंधित मांझा पहुंचाने वाले थोक विक्रेताओं और आपूर्ति नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है। हालांकि, बड़े कारोबारियों की संलिप्तता के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

विशेषज्ञों और नागरिकों की ओर से उठाई जा रही चिंता के अनुसार, केवल दुकानों पर छापेमारी करने के साथ-साथ मांझे की खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण की कड़ियों की जांच भी जरूरी है। यदि प्रतिबंधित मांझे की आपूर्ति के स्रोतों तक कार्रवाई पहुंचती है, तो इसकी बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

 

ड्रोन से निगरानी, छतों पर पतंगबाजी की जांच

कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर चीनी मांझे की चपेट में आने से साड़ी कारोबारी सुनील कुमार गुजराती (55) की मौत के बाद पुलिस ने निगरानी अभियान भी तेज किया है। जैतपुरा पुलिस ने कज्जाकपुरा, सरैया, शैलपुत्री मंदिर और सक्कर तालाब सहित आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए छतों पर पतंगबाजी करने वालों की निगरानी की।

चीनी मांझे के इस्तेमाल से होने वाले हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

 

अधिवक्ताओं ने मांगा एक करोड़ रुपये मुआवजा

साड़ी कारोबारी की मौत के विरोध में अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना देकर पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। अधिवक्ताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चीनी मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।

अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस की कार्रवाई प्रतिबंधित मांझे की बरामदगी और फुटकर विक्रेताओं की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है या इसकी आपूर्ति करने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ भी प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।