मणिकर्णिका घाट पर अंतिम यात्रा को लेकर उठे सवाल, प्रकाश जायसवाल ने प्रशासन पर साधा निशाना

 मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर सवाल, प्रकाश जायसवाल ने उठाई आवाज
 

वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचने वाले लोगों के वाहनों को आगे जाने से रोकने की व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। नेशनल इक्वल पार्टी के महासचिव एवं प्रवक्ता प्रकाश जायसवाल ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से आम नागरिकों और वीआईपी के लिए यातायात व्यवस्था के मानकों पर सवाल किया है।

प्रकाश जायसवाल ने कहा कि यदि वीआईपी वाहनों के काफिले को मैदागिन और गोदौलिया से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक जाने की अनुमति दी जा सकती है, तो अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर आने वाले आम नागरिकों के छोटे वाहनों को मणिकर्णिका घाट के मोड़ तक जाने से क्यों रोका जाता है।

उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार किसी परिवार के लिए महज एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने की अंतिम जिम्मेदारी और भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे समय में यदि परिवार को शव वाहन से उतारकर पैदल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह स्थिति बेहद पीड़ादायक हो सकती है।

आम नागरिकों के लिए अलग व्यवस्था पर सवाल

जायसवाल ने कहा कि यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था अपनी जगह जरूरी है, लेकिन इसके साथ अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों की परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकता है, जिसमें यातायात भी सुचारु रहे और शव लेकर आने वाले परिवारों को मणिकर्णिका घाट तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि काशी में वीआईपी सुविधा और आम नागरिक की अंतिम यात्रा के बीच किसी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था की समीक्षा कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।

आंदोलन की चेतावनी

प्रकाश जायसवाल ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो नेशनल इक्वल पार्टी जनता के साथ सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक आंदोलन करेगी।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी परिवार के सदस्य की अंतिम यात्रा हो रही हो, तब उसे सम्मानपूर्वक घाट तक पहुंचाने की सुविधा मिलनी चाहिए। यातायात व्यवस्था के नाम पर ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए जिससे अंतिम संस्कार के लिए आए लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़े।

बड़ा सवाल

मणिकर्णिका घाट की व्यवस्था को लेकर अब बहस इस बात पर है कि यातायात नियंत्रण और आम नागरिकों की अंतिम यात्रा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। प्रकाश जायसवाल के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।

सवाल यही है - क्या काशी में वीआईपी के लिए रास्ता और आम आदमी की अंतिम यात्रा के लिए अलग नियम होने चाहिए?

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