कैंट थाने के पास चल रहा था ऑनलाइन सट्टे का अड्डा, 'भाग्य लक्ष्मी' ऐप से जुआ खिलाने वाले 8 गिरफ्तार
वाराणसी। वाराणसी में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल कैंट थाने से महज 100 मीटर दूर सद्भावना पार्क के पीछे संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से नकदी, मोबाइल फोन और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एसीपी साइबर क्राइम विनय द्विवेदी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में पवन अग्रहरि, अंशुमान चंद्र, दीपक कुमार गुप्ता, मोहम्मद खुर्शीद, ललित मोहन उर्फ सोनू, विकास कुमार गुप्ता उर्फ विक्की, सुनील कुमार और शिव कुमार साहनी शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी 'भाग्य लक्ष्मी' नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइट के माध्यम से सट्टेबाजी का नेटवर्क चला रहे थे। गिरोह लोगों को वेबसाइट का लिंक भेजकर सट्टा खेलने के लिए जोड़ता था और नकद व ऑनलाइन भुगतान लेकर अंक आधारित जुआ खिलाता था।
पुलिस के अनुसार गिरोह सट्टेबाजी के दौरान सबसे अधिक चुने गए नंबरों का विश्लेषण कर परिणामों में कथित हेरफेर करता था, जिससे खिलाड़ियों को आर्थिक नुकसान होता था और गिरोह को मोटा मुनाफा मिलता था। पूरे नेटवर्क के संचालन के लिए व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 68,275 रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े दस्तावेज, हिसाब-किताब की पर्चियां और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए। जब्त मोबाइल फोन की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाई जा सके।
एसीपी विनय द्विवेदी ने बताया कि गिरोह के असली मास्टरमाइंड सहित अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है। पुलिस वित्तीय लाभार्थियों और तकनीकी सहयोगियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।
साइबर थाना प्रभारी उदयवीर सिंह ने आम लोगों से अपील की कि वे ऑनलाइन सट्टेबाजी, जुआ और जल्दी मुनाफा दिलाने का दावा करने वाले किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से दूर रहें और ऐसे मामलों की सूचना तत्काल पुलिस को दें।
नोट: यह समाचार पुलिस द्वारा जारी जानकारी और दर्ज मामले पर आधारित है। आरोपों की जांच जारी है। न्यायालय में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष हैं।