धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, बांसफाटक से गोदौलिया तक लगी श्रद्धालुओं की कतार
वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में धनतेरस के अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बांसफाटक स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन के लिए गुरुवार दोपहर से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। शुक्रवार की सुबह मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। देखते ही देखते बांसफाटक से गोदौलिया तक भक्तों की लंबी कतार लग गई। हर कोई मां के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्साहित नजर आया।
मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन का यह विशेष आयोजन पांच दिनों तक चलेगा। शुक्रवार की सुबह पांच बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। धनतेरस के दिन भक्तों को करीब साढ़े 18 घंटे तक दर्शन का अवसर मिलेगा। इस दौरान मां के दरबार में पारंपरिक रूप से खजाना वितरण भी किया जा रहा है। मंदिर की ओर से श्रद्धालुओं के बीच पांच क्विंटल लावा, 10 लाख सिक्के और रजत सिक्कों का वितरण किया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न और समृद्धि की देवी माना जाता है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ भी मां अन्नपूर्णा से भिक्षा प्राप्त करते हैं। इसी परंपरा के तहत हर वर्ष धनतेरस से अन्नकूट तक मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। श्रद्धालु खजाने के प्रसाद को घर ले जाकर सुरक्षित रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और अन्न-धन की बरकत बनी रहती है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, सात से 10 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह चार बजे से रात 11:15 बजे तक श्रद्धालु मां के दर्शन कर सकेंगे। 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर मां का विशेष शृंगार किया जाएगा। रात 11:30 बजे महाआरती के बाद स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के कपाट अगले एक वर्ष के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं। भक्तों को निर्धारित मार्ग से कतारबद्ध होकर दर्शन कराया जा रहा है। काशी में धनतेरस के साथ ही मां अन्नपूर्णा के दरबार में शुरू हुआ यह पांच दिवसीय आयोजन श्रद्धा, परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।