मातृ दिवस पर वृद्धाश्रम पहुंचा महिला भूमिहार समाज का स्नेह, वृद्ध माताओं संग बांटी खुशियां, गर्मी से राहत के लिए कुलर भेंट
कार्यक्रम की शुरुआत संस्कृत श्लोक “नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः...” के साथ हुई। इस दौरान उपस्थित महिलाओं ने कहा कि मां से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं होता और मातृ ऋण से मनुष्य कभी मुक्त नहीं हो सकता।
महिला भूमिहार समाज की संस्थापिका डॉ. राजलक्ष्मी राय ने कहा कि वृद्ध माताओं के साथ कुछ पल बिताना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि मां केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि वह निस्वार्थ प्रेम और त्याग की प्रतिमूर्ति होती है। जीवन के इस पड़ाव पर जब माताएं अपनों के साथ की कमी महसूस करती हैं, तब उनके बीच बैठकर अपनापन देना ही सच्ची सेवा है।
कार्यक्रम के दौरान समाज की सदस्याओं ने वृद्ध माताओं को भोजन कराया, उनके साथ भजन-कीर्तन किया तथा आत्मीय संवाद के माध्यम से उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया। वृद्ध माताओं की भावुकता और खुशी को देखकर मशहूर शायर मुनव्वर राना की पंक्तियां याद आ गईं-
“इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है,
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।”
इस अवसर पर समाज की सदस्य किरण सिंह ने वृद्धजन आवास में गर्मी से राहत देने के लिए सप्रेम कुलर भेंट किया।
कार्यक्रम में डॉ. राजलक्ष्मी राय, पूनम सिंह, डॉ. मंजुला चौधरी, शकुंतला राय, वंदना सिंह, सोनी राय, विजयता राय, प्रतिमा सिंह, चंद्रकला राय, सरिता राय, बबीता राय, उमा, अनिता, सीमा, सौम्या, विनीता, प्रिया, सुषमा, उर्मिला, अंबू, स्वर्णा, सुमन, मधु सहित बड़ी संख्या में महिला भूमिहार समाज की सदस्याएं उपस्थित रहीं।