बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में सजेगा सांस्कृतिक मंच, निर्मला सीतारमण करेंगी समारोह का शुभारंभ

काशी में सम्मानित होगी कर्नाटक संगीत की विरासत, 250वीं जयंती पर जारी होगा स्मारक सिक्का
 

वाराणसी। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के महान संगीतज्ञ मुथुस्वामी दीक्षितर की 250वीं जयंती के अवसर पर वाराणसी में विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा। तीन नवंबर को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण उनके सम्मान में जारी होने वाले स्मारक सिक्के का लोकार्पण करेंगी। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत में मुथुस्वामी दीक्षितर के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

आईआईटी बीएचयू के भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-आईकेएस) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 2:15 बजे भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र के उद्घाटन से होगी। इसके बाद मुख्य अतिथि स्वतंत्रता भवन पहुंचेंगी। यहां दीप प्रज्ज्वलन, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को श्रद्धांजलि, वैदिक मंत्रोच्चार और विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति के साथ समारोह आगे बढ़ेगा। आईआईटी बीएचयू के निदेशक केंद्रीय मंत्री का स्वागत करेंगे।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण होंगी। डॉ. सुमित्रा वासुदेव कर्नाटक शास्त्रीय गायन के माध्यम से मुथुस्वामी दीक्षितर को संगीतमय श्रद्धांजलि देंगी। इसके बाद रमना बालचंद्रन वीणा वादन प्रस्तुत करेंगे। उनके साथ गणपति रमन मृदंगम और एल. रामकृष्णन वायलिन पर संगत करेंगे। दोनों सांगीतिक प्रस्तुतियां लगभग 35-35 मिनट की होंगी।

बीएचयू के कुलपति के संबोधन के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्मारक सिक्के का लोकार्पण करेंगी और कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सिक्के का लोकार्पण शाम 3:58 से 4:20 बजे के बीच होगा। इसके बाद आईआईटी बीएचयू के निदेशक का संबोधन और धन्यवाद ज्ञापन होगा। अंत में वंदेमातरम और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुथुस्वामी दीक्षितर कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध त्रिमूर्ति में शामिल थे। उनकी रचनाओं में संस्कृत भाषा, भारतीय दर्शन और शास्त्रीय रागों का विशिष्ट समन्वय देखने को मिलता है। भारतीय संगीत परंपरा को समृद्ध करने में उनके योगदान को देखते हुए उनकी 250वीं जयंती पर यह स्मारक सिक्का जारी किया जा रहा है। उनके जीवन और संगीत पर काशी प्रवास की भी गहरी छाप रही है।