IMS-BHU में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित, विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल पर जताई चिंता
वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS-BHU) में रविवार को “एंटीमाइक्रोबियल्स - एविडेंस टू एक्सीलेंस” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एवं सीएमई (Continuing Medical Education) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के सही उपयोग, उनके दुष्प्रभाव और बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते चिकित्सा विज्ञान के दौर में चिकित्सकों को लगातार सीखने और शोध आधारित उपचार पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि जल्द ठीक होने की उम्मीद में बिना जरूरत एंटीबायोटिक देना भविष्य में गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि “सुविधा कभी भी सही चिकित्सा प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकती।” कुलपति ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती बताते हुए जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
आईएमएस-बीएचयू के डीन प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं के अतार्किक प्रयोग की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। उन्होंने चिकित्सकों से साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धति अपनाने की अपील करते हुए कहा कि कई सामान्य बीमारियों में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फिर भी इनका अनावश्यक उपयोग किया जाता है।
इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को समाज के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि केवल आवश्यकता पड़ने पर ही एंटीबायोटिक दवाएं दी जानी चाहिए और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. अरुण राज पांडेय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच एंटीमाइक्रोबियल्स के वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सा क्षेत्र में जागरूकता और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में ग्राम-पॉजिटिव एवं ग्राम-नेगेटिव संक्रमण, ICU में फंगल इन्फेक्शन, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, ऑर्गन डिस्फंक्शन में एंटीबायोटिक डोजिंग, ट्रॉपिकल इन्फेक्शंस और हेमेटो-ऑन्कोलॉजी मरीजों में संक्रमण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
आयोजन अध्यक्ष प्रो. ए.पी. सिंह, साइंटिफिक अध्यक्ष प्रो. यशपाल सिंह, डॉ. बिक्रम और डॉ. राजेश समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक कार्यक्रम में मौजूद रहे। बाहर से आए विशेषज्ञों में डॉ. अजय भल्ला, डॉ. राजेश पांडे, डॉ. अविनाश अग्रवाल, डॉ. विपिन, डॉ. जयप्रकाश, डॉ. शिखा सचान, डॉ. नीरज, डॉ. अतिहर्ष, डॉ. शशांक और डॉ. कीर्तनिया प्रमुख रूप से शामिल रहे।