काशी में गंगा पर बनेगा आधुनिक नमो ब्रिज, छह लेन सड़क और चार रेल ट्रैक से बदलेगी परिवहन व्यवस्था
वाराणसी। धर्मनगरी काशी में गंगा नदी पर बन रहा नमो ब्रिज आने वाले समय में सड़क और रेल परिवहन की तस्वीर बदलने वाला है। आधुनिक तकनीक से तैयार हो रहा यह डबल डेकर रेल-सड़क पुल वाराणसी की यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ पूर्वांचल की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुल के ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क और निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक बनाए जाएंगे।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में वाराणसी दौरे के दौरान निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने इसका नाम नमो ब्रिज रखने की घोषणा की। परियोजना को अगले 100 वर्षों की परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। निर्माण कार्य को निर्धारित समय से पहले पूरा करने पर भी जोर दिया गया है।
मालवीय पुल के पास होगा निर्माण
नमो ब्रिज का निर्माण मौजूदा मालवीय पुल के लगभग 50 मीटर नीचे की ओर किया जा रहा है। करीब 1201 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की कुल लंबाई एप्रोच मार्गों सहित लगभग 2.5 किलोमीटर होगी। पुल का मुख्य हिस्सा आधुनिक ओपन वेब स्टील गर्डर तकनीक से तैयार किया जाएगा। इसमें नदी के हिस्से में विशेष ट्विन-डी वेल फाउंडेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक साथ मजबूत होगी सड़क और रेल व्यवस्था
पुल के ऊपरी डेक पर छह लेन की सड़क बनने से गंगा पार आवागमन अधिक सुगम होगा। वहीं, निचले डेक पर चार रेलवे ट्रैक तैयार किए जाएंगे। इससे वाराणसी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच रेल परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी। यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
बिहार और पश्चिम बंगाल तक कनेक्टिविटी को मिलेगा लाभ
नमो ब्रिज के निर्माण से वाराणसी, चंदौली और आसपास के क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर सड़क एवं रेल संपर्क मजबूत होगा। माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने से व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
काशी रेलवे स्टेशन से जुड़ेगा पुल
परियोजना को काशी रेलवे स्टेशन के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों की आवाजाही आसान होगी और स्टेशन की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी। नमो घाट, काशी रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को भी सुविधा मिलेगी।
पुराने मालवीय पुल पर कम होगा दबाव
वर्ष 1887 में निर्मित मालवीय पुल लंबे समय से वाराणसी की रेल और सड़क कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण आधार रहा है। समय के साथ इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ा है। ऐसे में नया पुल तैयार होने के बाद पुराने पुल पर निर्भरता कम करने और रेल परिचालन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
नमो ब्रिज के निर्माण को पूर्वांचल की बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। इसके पूरा होने से काशी में परिवहन सुविधाओं का विस्तार होगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।