दिसंबर से आसमान में सफर करेगी काशी, रोपवे से जुड़ेंगे कैंट से गोदौलिया तक के प्रमुख इलाके
वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी जल्द ही आधुनिक परिवहन के एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। शहर की बहुप्रतीक्षित रोपवे परियोजना दिसंबर से शुरू होने की तैयारी में है। इसके संचालन के बाद काशी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अब सड़कों के जाम से जूझने के बजाय आसमान से शहर की खूबसूरती निहारते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। परियोजना का लगभग 96 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2023 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी थी। मई 2023 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। यह देश की पहली शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे परियोजना है। इसके शुरू होने से कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा और गोदौलिया के बीच आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है। खासकर शहर के व्यस्ततम इलाकों में यातायात के दबाव को कम करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
10 यात्रियों को लेकर हवा में चलेगा गोंडोला
रोपवे में अत्याधुनिक मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। प्रत्येक गोंडोला में एक बार में अधिकतम 10 यात्री सफर कर सकेंगे। इसकी अधिकतम गति छह मीटर प्रति सेकंड यानी लगभग 21.6 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। स्टेशन पर पहुंचने के दौरान गोंडोला की गति स्वतः कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों को सुरक्षित तरीके से चढ़ने और उतरने में सुविधा मिलेगी।
रेलवे स्टेशन से भी मिलेगी कनेक्टिविटी
परियोजना के तहत कैंट रेलवे स्टेशन को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ा गया है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर नौ की ओर से यात्रियों को रोपवे तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा काशी विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशन भी इस मार्ग के प्रमुख पड़ाव होंगे। इससे रेलवे से उतरकर शहर के प्रमुख इलाकों तक जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त परिवहन विकल्प मिलेगा।
60 किमी की रफ्तार से हवा चलने पर थमेगा संचालन
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रोपवे में अत्याधुनिक तकनीकी व्यवस्थाएं की गई हैं। सभी टावरों पर एनीमोमीटर लगाए गए हैं, जो हवा की गति पर नजर रखेंगे। हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा पहुंचने पर सुरक्षा के मद्देनजर सिस्टम स्वतः बंद हो जाएगा। बिजली आपूर्ति बाधित होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में बैकअप सिस्टम के जरिए गोंडोला को निकटतम स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बचाव दल को स्विट्जरलैंड में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
कैंट से गोदौलिया तक लगभग 50 रुपये किराया
रोपवे से कैंट से गोदौलिया तक की यात्रा का किराया लगभग 50 रुपये निर्धारित किया गया है। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड से भुगतान करने वाले यात्रियों को 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। शुरुआत के छह महीने तक संचालन और यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।
काशी के पर्यटन और यातायात को मिलेगी नई पहचान
रोपवे सेवा शुरू होने से काशी के पर्यटन को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है। गंगा घाटों, मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों को आवागमन का एक आकर्षक विकल्प मिलेगा। वहीं स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है। सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने के साथ पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी यह परियोजना अहम साबित हो सकती है। दिसंबर में इसके शुरू होने का इंतजार अब काशीवासियों को है।