ज्ञानवापी मामले में आठ जुलाई को होगी अगली सुनवाई, वाद मित्र नियुक्ति को दी गई चुनौती
वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर से जुड़े बहुचर्चित मामले में सोमवार को अपर जिला जज सप्तम विकास श्रीवास्तव की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान आदि विशेश्वर ज्योतिर्लिंग के मालिकाना हक, राग-भोग, पूजा-पाठ और मंदिर पुनर्निर्माण से जुड़े मूल वाद में वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
1991 में दाखिल हुआ था मूल वाद
ज्ञानवापी परिसर से जुड़ा यह मामला वर्ष 1991 में दाखिल किया गया था। उस समय तत्कालीन मुख्य पुजारी पंडित स्व. सोमनाथ व्यास, पंडित स्व. रामरंग शर्मा और पंडित स्व. हरिहर पांडेय ने अदालत में याचिका दायर कर आदि विशेश्वर ज्योतिर्लिंग के मालिकाना हक, पूजा-अर्चना, राग-भोग और मंदिर पुनर्निर्माण की मांग की थी।
यह मुकदमा अधिवक्ता स्व. बाबू दान बहादुर सिंह और पंडित स्व. संकटा प्रसाद तिवारी के माध्यम से दाखिल किया गया था।
वाद मित्र की नियुक्ति पर उठे सवाल
मामले में आवेदिका अनुष्का तिवारी ने अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि वर्ष 2019 में मूल वाद के एकमात्र जीवित वादी पंडित स्व. हरिहर पांडेय की स्थिति का लाभ उठाकर कथित रूप से षड्यंत्रपूर्वक वाद मित्र की नियुक्ति कराई गई थी। याचिका में कहा गया है कि नियुक्ति की प्रक्रिया उचित तरीके से नहीं हुई और अदालत से उस आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है।
अदालत में हुई सुनवाई
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अदालत में अपने-अपने तर्क रखे गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई 8 जुलाई को तय की है। ज्ञानवापी परिसर से जुड़े इस पुराने वाद में लगातार कानूनी और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहलुओं पर सुनवाई चल रही है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
धार्मिक और कानूनी रूप से महत्वपूर्ण मामला
ज्ञानवापी विवाद देश के सबसे चर्चित धार्मिक और कानूनी मामलों में शामिल है। इस मामले से जुड़े विभिन्न वादों पर वाराणसी की अदालतों में अलग-अलग स्तर पर सुनवाई जारी है। अब वाद मित्र की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।