वाराणसी में गंगा उफान की ओर, प्रशासन ने घाटों पर बढ़ाई चौकसी
वाराणसी। गंगा नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते वाराणसी के कई घाटों का आपसी संपर्क टूटने लगा है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि फिलहाल स्थिति चिंताजनक नहीं है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार रविवार सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 61.05 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद शाम तक जलस्तर में आठ सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। जल पुलिस के प्रभारी निरीक्षक सुधीर त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
काशी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.26 मीटर तथा खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। वर्ष 1978 में गंगा का जलस्तर 73.90 मीटर तक पहुंचा था, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है।
जलस्तर बढ़ने के कारण राजघाट से अस्सी घाट तक कई स्थानों पर घाटों का आपसी संपर्क प्रभावित होने लगा है। यदि इसी गति से जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो आने वाले दिनों में प्रमुख घाटों का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राजघाट से अस्सी घाट तक प्रमुख घाटों और जेटियों पर बैरिकेडिंग कर दी है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गहरे पानी में स्नान न करने तथा नाव यात्रा के दौरान अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट पहनने की अपील की गई है।
घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करते हुए पुलिस, पीएसी और एनडीआरएफ की टीमों की तैनाती की गई है। सभी एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखे गए हैं।
गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों में भी सतर्कता बढ़ गई है। हालांकि दशाश्वमेध सहित अन्य प्रमुख घाटों पर ऊपरी हिस्से में नियमित रूप से गंगा आरती का आयोजन जारी है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, सुरक्षा मानकों का पालन करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन करें। जल पुलिस एवं एनडीआरएफ की टीमें लगातार गश्त कर स्थिति की निगरानी कर रही हैं।