राफेल से सुखोई तक, आसमान में उड़ते लड़ाकू विमानों को ऐसे पहचानें

आसमान में गरजेंगे लड़ाकू विमान, उनकी बनावट से पहचानने का जानें तरीका
 
राफेल, सुखोई या तेजस! पंखों की बनावट से पहचानें लड़ाकू विमान

 

वाराणसी। काशी के आसमान में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की गर्जना के बीच लोगों में इन्हें करीब से जानने और पहचानने की उत्सुकता बढ़ रही है। नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी तेजस जैसे विमानों के प्रदर्शन ने लड़ाकू विमानों की तकनीक, गति और बनावट को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में पंखों के आकार, विमान की बनावट और इंजन की संरचना के आधार पर इनकी पहचान की जा सकती है।

 

लड़ाकू विमान देखने में भले ही एक जैसे लगें, लेकिन उनकी डिजाइन में कई महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस की बनावट को ध्यान से समझने पर इन्हें अलग-अलग पहचानना आसान हो जाता है।

राफेल की पहचान उसके त्रिकोणाकार पंखों से

फ्रांस में निर्मित राफेल आधुनिक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसके पंख त्रिकोणाकार यानी डेल्टा आकार के होते हैं। पंखों के आगे की ओर छोटे अतिरिक्त पंख जैसी संरचना भी दिखाई देती है, जिसे कैनार्ड कहा जाता है। विमान की यह बनावट इसे हवा में तेजी से दिशा बदलने और विभिन्न प्रकार के हवाई अभियानों में सक्षम बनाने में मदद करती है। राफेल की सधी हुई बनावट और दो इंजनों वाली संरचना इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।

सुखोई-30 एमकेआई की पहचान उसके बड़े आकार से

रूस की तकनीक पर आधारित सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसका आकार राफेल और तेजस की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है। इसमें दो इंजन और दो लंबवत खड़े पिछले पंख होते हैं। इसकी चौड़ी बॉडी और बड़े पंख इसे हवा में विभिन्न प्रकार के युद्धाभ्यास करने में सक्षम बनाते हैं। आसमान में उड़ते समय इसका बड़ा आकार और दो पिछले वर्टिकल टेल विमान की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

स्वदेशी तेजस छोटा और हल्का लड़ाकू विमान

तेजस भारत में विकसित हल्का लड़ाकू विमान है। इसका आकार अपेक्षाकृत छोटा है और इसमें डेल्टा विंग डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है। राफेल की तरह इसके पंखों के आगे कैनार्ड नहीं होते। तेजस एक इंजन वाला विमान है, जबकि राफेल और सुखोई-30 एमकेआई में दो-दो इंजन हैं। हल्की बनावट और आधुनिक तकनीक इसे भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में स्थान दिलाती है।

सिर्फ पंखों से पहचानना हमेशा आसान नहीं

आसमान में तेज गति से गुजरते लड़ाकू विमानों की पहचान केवल पंखों के आकार से करना हर बार आसान नहीं होता। दूरी, रोशनी, विमान की उड़ान की दिशा और ऊंचाई के कारण कई बार उनकी बनावट स्पष्ट दिखाई नहीं देती। ऐसे में विमान के आकार, इंजनों की संख्या, पिछले हिस्से की संरचना और उड़ान के दौरान दिखाई देने वाली आकृति को एक साथ समझना उपयोगी होता है।

वाराणसी में हो रहे एयर शो के दौरान लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन न केवल रोमांच का अवसर है, बल्कि लोगों को आधुनिक विमानन तकनीक से परिचित कराने का भी माध्यम है। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे विमानों की अलग-अलग खूबियां भारतीय वायुसेना की विविध क्षमताओं और हवाई शक्ति की झलक प्रस्तुत करती हैं।