काशी में बाबा कालभैरव का अलौकिक हिम श्रृंगार, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन

 बाबा कालभैरव के हिम श्रृंगार ने बिखेरी आध्यात्मिक छटा, दिनभर उमड़ी भक्तों की भीड़
 
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ बाबा कालभैरव का हिम श्रृंगार, भक्तिमय हुआ पूरा मंदिर परिसर

वाराणसी। सावन मास के पावन अवसर पर काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का पारंपरिक एवं भव्य हिम श्रृंगार महोत्सव गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। बाबा के दिव्य हिम श्रृंगार एवं मनोहारी झांकी के दर्शन के लिए प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पूरे दिन मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बाबा कालभैरव के जयघोष से गूंजता रहा।

महोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों, मालाओं, हरी पत्तियों, फलों तथा बर्फ की सिल्लियों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। हिम श्रृंगार के कारण पूरा परिसर अलौकिक एवं भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित हो गया, जिसने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पंचामृत अभिषेक

श्रृंगार महोत्सव के दौरान संयोजक पवन कुमार उपाध्याय के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा कालभैरव का पंचामृत अभिषेक संपन्न कराया गया। इसके उपरांत बाबा को सिंदूर अर्पित कर नवीन वस्त्र एवं विशेष मुखौटा धारण कराया गया। तत्पश्चात सुगंधित पुष्पों, आभूषणों एवं विविध धार्मिक सामग्रियों से उनका दिव्य हिम श्रृंगार किया गया। दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे आयोजन के दौरान बनी रही।

बर्फानी बाबा की झांकी बनी मुख्य आकर्षण

मंदिर परिसर में अमरनाथ धाम की तर्ज पर बर्फ की सिल्लियों से बर्फानी बाबा की आकर्षक प्रतिकृति तैयार की गई, जिसने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इसके साथ ही बाबा कालभैरव की रजत प्रतिमा की भव्य झांकी भी सजाई गई। श्रद्धालुओं ने निर्धारित व्यवस्था के तहत जलाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

फूलों, हिमखंडों और कृत्रिम हिम सरोवर से सजा परिसर

मंदिर परिसर को गुलाब, गेंदा, बेला सहित विभिन्न सुगंधित पुष्पों, रंग-बिरंगे हिमखंडों, कृत्रिम हिम सरोवर, हरी पत्तियों एवं फलों से आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया। अलौकिक सजावट का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस दिव्य श्रृंगार को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।

दो दशक पुरानी परंपरा का निर्वहन

मंदिर के पुजारियों ने बताया कि बाबा कालभैरव का विशेष हिम श्रृंगार प्रत्येक वर्ष केवल सावन मास में किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस विशेष अनुष्ठान से अत्यधिक वर्षा, प्राकृतिक आपदाओं एवं जनकल्याण की कामना की जाती है। यह परंपरा पिछले लगभग 20 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है और प्रत्येक वर्ष इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

श्रृंगार महोत्सव के समापन पर मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें देर शाम तक श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर बाबा कालभैरव का गुणगान करते रहे।