BHU के इतिहास प्रश्नपत्र पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस नेता राघवेंद्र चौबे ने उठाए सवाल

 

 वाराणसी। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के एमए इतिहास प्रश्नपत्र में पूछे गए विवादित प्रश्न को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। महानगर कांग्रेस कमेटी वाराणसी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने प्रश्नपत्र में शामिल सामग्री पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप करार दिया है।

राघवेंद्र चौबे ने जारी बयान में कहा कि देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में इस प्रकार के प्रश्न पूछे जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा संस्थानों में लगातार वैचारिक प्रभाव बढ़ता जा रहा है और इतिहास को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करने के बजाय उसे राजनीतिक दृष्टिकोण से गढ़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” जैसे शब्दों को प्रश्नपत्र में शामिल कर समाज के एक वर्ग विशेष के प्रति नकारात्मक सोच उत्पन्न करने की कोशिश की जा रही है। विश्वविद्यालयों को वैचारिक प्रयोगशाला बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और अकादमिक स्वतंत्रता दोनों के लिए उचित नहीं है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास को तथ्यों, प्रमाणों और संतुलित दृष्टिकोण के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए, न कि किसी संगठन विशेष की विचारधारा के अनुसार। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते वैचारिक हस्तक्षेप को देश की अकादमिक परंपरा और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया।

राघवेंद्र चौबे ने विश्वविद्यालय प्रशासन से विवादित प्रश्न को तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही भविष्य में शिक्षा संस्थानों का उपयोग किसी राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे के लिए न किए जाने को सुनिश्चित करने की बात कही।