बढ़ते गंगा जलस्तर से धीमा पड़ा शवदाह गृह का निर्माण, दिसंबर तक शुरू होने की उम्मीद

घाट पर निर्माण कार्य से अंतिम संस्कार की जगह घटी, घंटों इंतजार को मजबूर लोग

 
 मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट पर अत्याधुनिक शवदाह गृह का काम प्रभावित, दिसंबर तक संचालन की तैयारी

वाराणसी। गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के मौसम का असर मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर निर्माणाधीन अत्याधुनिक शवदाह गृह की परियोजना पर पड़ा है। जलस्तर बढ़ने के कारण निर्माण कार्य की गति धीमी हो गई है। हालांकि, परियोजना का 50 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य को भी जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि हरिश्चंद्र घाट पर अत्याधुनिक शवदाह गृह का संचालन दिसंबर तक शुरू हो जाएगा।

निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास का काम कई चरणों में किया जा रहा है। इसके तहत घाट के प्लेटफॉर्म को ऊंचा किया जा रहा है। करीब 300 मीटर क्षेत्र में पक्का निर्माण प्रस्तावित है। अत्याधुनिक शवदाह गृह में करीब 25 मीटर ऊंची चिमनी के साथ पवित्र जलकुंड, अपशिष्ट ट्रॉलियां, मुंडन क्षेत्र और पांच बर्थ वाला दाह संस्कार क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, निर्माण के दौरान पाइलिंग के बाद उसकी मजबूती और गुणवत्ता की जांच के लिए करीब 28 दिनों का समय लगता है। इसी दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति बनने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। जलस्तर कम होने के बाद शेष कार्य में तेजी लाने की तैयारी है।

निर्माण के कारण अंतिम संस्कार के लिए सीमित हुई जगह

मणिकर्णिका घाट पर निर्माण कार्य का असर अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। घाट पर जगह-जगह खुदाई और निर्माण होने के कारण शवदाह के लिए उपलब्ध स्थान सीमित हो गया है। पहले जहां एक साथ करीब 25 चिताओं का अंतिम संस्कार किया जा सकता था, वहीं वर्तमान में 10 से 15 चिताओं के लिए ही स्थान उपलब्ध है।

इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। निर्माण कार्य के कारण श्रद्धालुओं और अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को भी आवागमन एवं अन्य व्यवस्थाओं में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी और आधुनिक सुविधाओं का लाभ लोगों को मिल सकेगा। निर्माण कार्य को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए प्रयास जारी हैं।