Banarasi yadav encounter: सुपारी किलर बनारसी यादव को यूपी STF ने किया ढेर, 23 साल की उम्र में जुर्म की दुनिया में रखा था कदम

वाराणसी में STF एनकाउंटर: एक लाख का इनामी शूटर बनारसी यादव ढेर, कॉलोनाइजर हत्याकांड का था मुख्य आरोपी
 

Mahendra Gautam Murder Case वाराणसी में STF एनकाउंटर में एक लाख का इनामी सुपारी किलर बनारसी यादव मारा गया। कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम हत्याकांड का था मुख्य आरोपी।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में मंगलवार रात स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक लाख रुपये का इनामी कुख्यात अपराधी बनारसी यादव मुठभेड़ में मारा गया। बनारसी यादव पर सारनाथ थाना क्षेत्र में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या का आरोप था और वह बीते 166 दिनों से फरार चल रहा था।

STF के अनुसार, यह मुठभेड़ चौबेपुर थाना क्षेत्र के बरियासनपुर रिंग रोड पर हुई। सूचना मिली थी कि बनारसी यादव गाजीपुर-वाराणसी हाईवे के रास्ते कहीं भागने की फिराक में है। इसी आधार पर STF और स्थानीय पुलिस ने घेराबंदी की।

पुलिस पर फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में घायल

पुलिस को देखकर बनारसी यादव ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं।

सुपारी लेकर करता था हत्याएं

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (STF) अमिताभ यश ने बताया कि बनारसी यादव पेशेवर सुपारी किलर था। वह पैसे लेकर हत्या की वारदातों को अंजाम देता था। कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

जमीन विवाद में दी गई थी हत्या की सुपारी

पुलिस जांच में सामने आया है कि महेंद्र गौतम की हत्या की सुपारी गाजीपुर निवासी जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू ने दी थी। 60 करोड़ रुपये की 29 बिस्वा जमीन को लेकर चल रहे विवाद में यह हत्या कराई गई थी। बनारसी यादव के साथ अरविंद यादव उर्फ फौजी और विशाल यादव को भी इस वारदात में शामिल किया गया था। तीनों शूटरों को दो-दो लाख रुपये और हथियार उपलब्ध कराए गए थे। हथियार बिहार के मुंगेर से मंगवाए गए थे।

21 से अधिक गंभीर मुकदमे थे दर्ज

कुख्यात अपराधी बनारसी यादव के खिलाफ वाराणसी, गाजीपुर और सोनभद्र समेत विभिन्न जिलों में 21 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। उसने वर्ष 2003 में गाजीपुर के खानपुर थाने से चोरी के मामले में पहली बार जेल की हवा खाई थी। इसके बाद वह लगातार अपराध की दुनिया में आगे बढ़ता गया।

पुलिस से बचने के लिए नहीं करता था मोबाइल और बैंक खातों का इस्तेमाल

पुलिस के अनुसार, बनारसी यादव गिरफ्तारी से बचने के लिए मोबाइल फोन और बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करता था। वह अकेले रहकर लगातार ठिकाने बदलता रहता था। कॉलोनाइजर की हत्या के बाद वह मुंबई और कर्नाटक में भी छिपा रहा।

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति

इस एनकाउंटर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले भी मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि अपराधी पुलिस पर फायर करेगा, तो पुलिस मूकदर्शक नहीं बन सकती।

फरार अन्य आरोपियों की तलाश जारी

महेंद्र गौतम हत्याकांड में शामिल दूसरे आरोपी अरविंद यादव उर्फ फौजी को पहले ही मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीसरे आरोपी विशाल यादव की तलाश अभी जारी है।