जेल में गमछे पर लगा बैन! सुरक्षा को लेकर प्रशासन का बड़ा एक्शन, अब सिर्फ तौलिए की अनुमति
जौनपुर। जिला कारागार जौनपुर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से जेल प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब जेल परिसर में गमछा ले जाने और इस्तेमाल करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह नियम बंदियों, कैदियों और मुलाकातियों समेत सभी पर समान रूप से लागू होगा। गमछे के स्थान पर अब केवल तौलिए के उपयोग की अनुमति दी जाएगी।
जेल प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से गमछा एक संवेदनशील वस्तु बन चुका था। इसके जरिए आत्महत्या की घटनाओं की आशंका बनी रहती थी, वहीं प्रतिबंधित सामान को छिपाकर अंदर-बाहर ले जाने का भी खतरा था। इसी वजह से यह निर्णय लिया गया है।
जौनपुर जिला जेल में क्षमता से दोगुने से अधिक बंदी मौजूद हैं। जेल की निर्धारित क्षमता 320 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में यहां 753 विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदी निरुद्ध हैं। बढ़ती भीड़ के कारण सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।
जेल प्रशासन ने बताया कि 21 नवंबर 2025 को मोहम्मद सुफियान नामक बंदी ने गमछे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और गमछे के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
प्रशासन के अनुसार तौलिया गमछे की तुलना में कम लचीला होता है, जिससे उसका दुरुपयोग करना कठिन है। साथ ही इसकी मोटाई के कारण उसमें किसी प्रकार की प्रतिबंधित वस्तु छिपाना भी आसान नहीं होता। कैदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जेल कैंटीन में तौलिए उपलब्ध करा दिए गए हैं।
ब्रिटिश काल में वर्ष 1870 में बनी इस जेल में वर्तमान में 151 सजायाफ्ता और 602 विचाराधीन बंदी हैं। इनमें पुरुष, महिला और अल्पवयस्क बंदी भी शामिल हैं। वहीं गंभीर अपराधों में निरुद्ध कई कैदी भी यहां रखे गए हैं।
इसी बीच जौनपुर में 1200 बंदियों की क्षमता वाली नई हाईटेक जेल का निर्माण भी जारी है। नई जेल में सीसीटीवी निगरानी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, उच्च सुरक्षा बैरक, अस्पताल और आवासीय परिसर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
जेल अधीक्षक पी.के. त्रिवेदी ने कहा कि बंदियों और जेल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गमछे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह कदम जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है।