नौतपा की शुरुआत पर बाबा विश्वेश्वर का विशेष अभिषेक, फलों के रस से हुआ दिव्य श्रृंगार

नौतपा के पहले दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वेश्वर का गुलाब, लीची और आम के रस से विशेष अभिषेक किया गया। नौ दिनों तक अलग-अलग फलों के रस से विशेष पूजा की जाएगी।

 
गुलाब, लीची और आम के रस से किया गया बाबा का अभिषेक, श्रद्धालुओं में दिखी गहरी आस्था
 

वाराणसी। ग्रीष्म ऋतु के अत्यधिक उष्ण नौ दिवसीय काल “नौतपा” का रविवार से शुभारंभ हो गया। नौतपा के पहले दिन काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वेश्वर का विशेष पूजन-अर्चन और फलों के रस से दिव्य अभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बाबा विश्वनाथ का अभिषेक गुलाब, लीची और आम के रस से संपन्न हुआ। अभिषेक के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

नौ दिनों तक होगा विशेष अभिषेक

मंदिर प्रशासन के अनुसार नौतपा के सभी नौ दिनों तक प्रतिदिन अलग-अलग फलों के रस और शीतल पदार्थों से बाबा विश्वेश्वर का विशेष अभिषेक किया जाएगा। इस परंपरा का उद्देश्य भीषण गर्मी के दौरान भगवान शिव को शीतलता अर्पित करना और भक्तों को आध्यात्मिक शांति का संदेश देना है।

धार्मिक मान्यता है कि नौतपा के दौरान भगवान शिव का विशेष पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। इसी कारण हर वर्ष इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचते हैं।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/a8VdIMBgH8A?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/a8VdIMBgH8A/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

मंदिर परिसर में उमड़ी भक्तों की भीड़

नौतपा की शुरुआत के साथ ही काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में भक्ति संगीत और वैदिक मंत्रों की गूंज से आध्यात्मिक माहौल बना रहा।

शीतलता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश

धार्मिक विद्वानों के अनुसार नौतपा के दौरान फलों के रस से अभिषेक करने की परंपरा प्रकृति और आध्यात्मिकता के संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। इससे भक्तों को यह संदेश दिया जाता है कि भीषण गर्मी के बीच भी संयम, शांति और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।

काशी में नौतपा के इस विशेष धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है।