एक शाम देश के महान क्रांतिकारियों के नाम! हिन्दू युवा वाहिनी ने धूमधाम से मनाई वंदे मातरम की 75वीं वर्षगांठ
वाराणसी। धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में रविवार की शाम देशभक्ति के रंग में रंगी हुई दिखाई दी। अवसर था राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 75वीं वर्षगांठ का, जिसे त्रिशक्ति सेवा फाउंडेशन और हिंदू युवा वाहिनी वाराणसी द्वारा संयुक्त रूप से मैदागिन स्थित गुरु गोरक्षनाथ मंदिर परिसर में मनाया गया। कार्यक्रम का शीर्षक रखा गया - एक शाम देश के महान क्रांतिकारियों के नाम।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज शामिल हुए। इस दौरान उपस्थित लोगों ने शहीदों को नमन किया और भारत माता के वीर सपूतों को याद किया।
हिंदू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी अंबरीश सिंह भोला ने बताया कि इस अवसर पर शहीद चंदन राय, राजाराम यादव और दीपक वर्मा के परिजनों के साथ कारगिल युद्ध के वीर योद्धा अजय सिंह को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान पूरा वातावरण भावुक हो उठा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कलाकारों ने वीरता और बलिदान को समर्पित गीतों से ऐसा जोश और ऊर्जा भरा कि श्रोता राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत हो उठे।
महंत शंकर पुरी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि 7 सितम्बर को राष्ट्रीय गीत दिवस के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 07 सितम्बर 1950 को पहली बार संसद में वंदे मातरम गाया गया था। उल्लेखनीय है कि वंदे मातरम गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था।
जिसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रस्तुत किया गया था। स्वतंत्र भारत में 1950 में जन गण मन को राष्ट्रीय गान और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से जहां शहीदों के बलिदान को याद किया गया, वहीं नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम और संस्कृति से जुड़ने का संदेश भी दिया गया।