गंगा इफ्तार प्रकरण में आठ आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत, अधिवक्ता शशांक त्रिपाठी का बयान

 गंगा इफ्तार प्रकरण में आठ आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने बयान जारी कर संविधान, न्यायपालिका और सामाजिक सौहार्द की बात कही।
 

वाराणसी। चर्चित गंगा इफ्तार प्रकरण में आठ आरोपियों को माननीय उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान और न्यायपालिका प्रत्येक नागरिक को न्याय के साथ-साथ आत्मसुधार का अवसर भी प्रदान करती है।

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि न्यायालय द्वारा जमानत दिया जाना न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी पक्षों को इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून पर विश्वास और न्यायपालिका के निर्णयों का सम्मान भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।

उन्होंने अपने बयान में मां गंगा को करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और सनातन सभ्यता का प्रतीक बताते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि देश की आध्यात्मिक पहचान हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह मां गंगा के प्रति श्रद्धा और मर्यादा बनाए रखे।

अधिवक्ता ने कहा कि सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और सामाजिक सौहार्द एवं भाईचारे को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता, सहिष्णुता और संवैधानिक मूल्यों में निहित है।

गौरतलब है कि गंगा इफ्तार प्रकरण को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था। अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।