काशी में मां दुर्गा की विदाई का अद्भुत नजारा, 100 महिलाओं के शंखनाद ने मोहा मन
वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में मां दुर्गा की विदाई के दौरान बंगाली परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। शुक्रवार को गोल्डन स्पोर्टिंग क्लब की ओर से निकाली गई विसर्जन शोभायात्रा में 108 ढाक वादकों की थाप और 100 महिलाओं के शंखनाद ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। मां दुर्गा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता को विदाई दी और अगले वर्ष फिर आगमन की कामना की।
देवनाथपुरा स्थित पूजा पंडाल से शुरू हुई शोभायात्रा में बंगाली संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल महिलाओं ने धुनुची नृत्य किया। मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ चल रहे श्रद्धालु रास्ते भर पूजा-अर्चना करते रहे। ढाक की गूंज और शंखनाद के बीच शोभायात्रा मदनपुरा होते हुए गोदौलिया पहुंची। यहां जनप्रतिनिधियों ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। इसके बाद यात्रा मैदागिन की ओर बढ़ी।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। मां की प्रतिमा के दर्शन के लिए रास्ते में लोग जुटे रहे। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकली इस यात्रा ने काशी की सांस्कृतिक विरासत और बंगाली समाज की आस्था को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
इससे पहले पूजा पंडाल में महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म निभाई। मां दुर्गा को मिठाई और पान अर्पित करने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। मां के आंचल में खोइंचा भरकर उन्हें बेटी की तरह विदाई दी गई। इस दौरान भावुक माहौल देखने को मिला।
देवनाथपुरा से विसर्जन स्थल तक लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब चार घंटे 15 मिनट लगे। पूजा, परिक्रमा और आरती के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। शोभायात्रा में गोल्डन स्पोर्टिंग क्लब के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
काशी में मां दुर्गा की विदाई का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंगाली परंपरा, लोक संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना करते हुए अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दिया।