चंदौली में बीज की दुकानों पर छापा, 42 प्रतिष्ठानों की जांच, 20 नमूने लिए गए, 5 दुकानों को नोटिस
चंदौली। रबी फसलों की बुआई के सीजन में किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने जिले में बीज बिक्री केंद्रों पर औचक छापेमारी की। इस दौरान कुल 42 दुकानों का निरीक्षण किया गया और सरसों, चना, मटर तथा गेहूं के 20 नमूने लिए गए। वहीं, पांच बीज एवं उर्वरक प्रतिष्ठान बंद पाए जाने पर उनके संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
कृषि विभाग एवं अन्य विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारियों की गठित टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में यह कार्रवाई की। उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी तथा संबंधित कृषि अधिकारियों के नेतृत्व में सकलडीहा, चंदौली सदर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, चकिया और नौगढ़ क्षेत्र के बीज बिक्री केंद्रों का निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान लिए गए बीज नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच में बीज अधोमानक पाए जाने पर बीज नियंत्रण आदेश, 1983 और बीज अधिनियम, 1966 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बंद पाए गए प्रतिष्ठानों में मेसर्स ईश्वर बीज भंडार, जनौली; मेसर्स उमरावती एग्री जंक्शन खाद-बीज भंडार, कमालपुर; मेसर्स पंडित खाद एवं बीज भंडार, कमालपुर; मेसर्स खुशबू बीज भंडार, धानापुर और मेसर्स आदर्श कृषि विकास, धानापुर शामिल हैं।
किसान खरीदते समय जरूर रखें इन बातों का ध्यान
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि रबी फसलों की बुआई के लिए गेहूं, चना, मटर और सरसों सहित अन्य फसलों के केवल प्रमाणित बीज ही खरीदें। बीज खरीदते समय दुकानदार से कैश मेमो अवश्य लें, ताकि जरूरत पड़ने पर खरीद का प्रमाण उपलब्ध रहे।
विभाग ने सभी बीज विक्रेताओं को अपने स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर अद्यतन रखने तथा प्रत्येक किसान को बीज के साथ कैश मेमो उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जिले में खाद का पर्याप्त भंडार
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में रबी फसलों की बुआई के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। निजी और सहकारी बिक्री केंद्रों पर यूरिया का 17,031 मीट्रिक टन, डीएपी का 8,461 मीट्रिक टन और एनपीके का 3,337 मीट्रिक टन भंडार उपलब्ध बताया गया है।
विभाग ने किसानों से फार्मर रजिस्ट्री और प्रमाणित खतौनी के साथ उर्वरक खरीदने तथा बोई जाने वाली फसल के लिए कृषि विशेषज्ञों द्वारा संस्तुत मात्रा के अनुसार ही खाद का इस्तेमाल करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि निर्धारित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करने से अनावश्यक खर्च से बचने और फसल के बेहतर विकास में मदद मिल सकती है।