कर्मनाशा नदी के कटान से दहशत, डीएम से कार्रवाई की मांग

 कर्मनाशा के कटान से खुदांव, गायघाट और कोनियां में संकट, डीएम से स्थायी समाधान की मांग
 

चंदौली। कर्मनाशा नदी में बाढ़ के बाद तेज हुए कटान से सदर विकासखंड क्षेत्र के खुदांव, गायघाट और कोनियां गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। नदी के लगातार कटाव से कहीं मुख्य मार्ग तो कहीं कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर रिहायशी मकानों और अन्य संपत्तियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते प्रभावी कदम उठाकर कटान की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।

समस्या को लेकर जिला पंचायत क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि ने जिलाधिकारी चंदौली को पत्र भेजकर प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। पत्र में कटान से उत्पन्न स्थिति का तकनीकी सर्वे कराने के साथ ही संवेदनशील स्थानों पर तत्काल सुरक्षात्मक कार्य कराए जाने का आग्रह किया गया है।

पत्र के अनुसार, खुदांव गांव में कर्मनाशा नदी के किनारे बाढ़ के बाद कटान तेज हो गया है। मुख्य मार्ग के समीप लगातार मिट्टी कटने से आवागमन का रास्ता भी खतरे की जद में है। यदि कटान की रफ्तार नहीं थमी तो मुख्य मार्ग का हिस्सा नदी में समाहित होने की आशंका है। इससे ग्रामीणों के आवागमन के साथ आसपास के परिवारों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

गायघाट गांव में कटान से कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा है। पत्र में करीब 30 एकड़ कृषि भूमि नदी में समाहित होने का उल्लेख किया गया है। इससे किसानों के सामने खेती योग्य जमीन बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान कटान की समस्या बढ़ती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण स्थिति दोबारा गंभीर हो जाती है।

इसी तरह कोनियां गांव में नदी के तेज बहाव और पानी के दबाव से बस्ती के आसपास कटान हुआ है। इससे ग्रामीणों में रिहायशी मकानों और अन्य संपत्तियों को लेकर आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटान पर नियंत्रण नहीं किया गया तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।

ग्रामीणों के मुताबिक कर्मनाशा नदी के कटान की समस्या वर्षों पुरानी है। बाढ़ के दौरान हर साल संवेदनशील स्थानों पर कटान होता है और ग्रामीणों की कृषि भूमि तथा अन्य संपत्तियां प्रभावित होती हैं। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर समस्या से अवगत कराया जाता रहा है, लेकिन स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से समस्या बनी हुई है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से खुदांव, गायघाट और कोनियां में विशेषज्ञ टीम भेजकर कटान प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की है। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर बोल्डर पिचिंग, तटबंध और अन्य तकनीकी उपायों के जरिए कटान रोकने की स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल कृषि भूमि के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्य मार्ग, रिहायशी इलाकों और लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ी है। ऐसे में प्रशासन से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि आने वाले समय में नदी के कटान से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।