चंदौली में तीसरी बार बुलाई गई खुली बैठक, फिर नहीं पहुंचे अधिकारी, राशन के लिए दूसरे गांव जाने को मजबूर ग्रामीण
चंदौली। धानापुर विकासखंड के रामपुर दिया गांव में कोटे की दुकान के चयन के लिए मंगलवार को प्रस्तावित खुली बैठक अधिकारियों के नहीं पहुंचने से नहीं हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह तीसरी बार है, जब बैठक के लिए तिथि निर्धारित की गई, लेकिन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लगातार बैठक स्थगित होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने समय रहते कोटे की दुकान का चयन नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्रामीण दिनेश यादव ने बताया कि रामपुर दिया ग्राम पंचायत में पिछले तीन बार से अधिकारियों द्वारा तिथि निर्धारित किए जाने के बावजूद खुली बैठक नहीं कराई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके दबाव में बैठक नहीं हो पा रही है। कुछ ग्रामीणों ने सत्ता पक्ष के दबाव की आशंका भी जताई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोटे की दुकान का चयन नहीं होने के कारण उन्हें राशन लेने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें आवागमन और राशन प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण चंदन यादव ने बताया कि इस समस्या को लेकर जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से खुली बैठक कराने की मांग की गई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को बैठक निर्धारित की गई थी, लेकिन अधिकारी नहीं पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बैठक आयोजित नहीं करनी थी, तो ग्रामीणों को बार-बार बुलाकर परेशान क्यों किया जा रहा है।
ग्राम विकास अधिकारी का मोबाइल बंद, बीडीओ ने कार्रवाई का दिया भरोसा
मामले में ग्राम विकास अधिकारी सुनील कुमार से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी राकेश मिश्रा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर रामपुर दिया गांव में खुली बैठक कराई जानी थी। अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी कराई जा रही है और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
खुली बैठक नहीं होने पर चंदन यादव, दिनेश यादव, पप्पू यादव, सुभाष यादव, नंदू यादव, दुलारे यादव, महेंद्र गोड़, सदरू नाई, हृदयनारायण गुप्ता, रामायण यादव, पंकज यादव, राजेश यादव, रमेश यादव, सुरेश यादव, शिवकुमार यादव, काशीनाथ यादव, शरद यादव, अरुण यादव, अनुराग यादव, अजय यादव, कृष्णा यादव, धर्मेंद्र यादव, क्रिसल्य यादव, अवधेश यादव, जानकी यादव, हीरा देवी, पूनम यादव, इंदु देवी, नौरंगी देवी, इंद्रावती यादव और कुमारी देवी सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द खुली बैठक कराकर कोटे की दुकान का चयन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।