रेवसा गांव में रामकथा के चौथे दिन गूंजा सीता-राम विवाह प्रसंग, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
रामकथा व्यास गौतम जी महाराज ने बताया कि मिथिला नरेश राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का दिव्य धनुष रखा हुआ था, जिसे कोई भी उठा नहीं पाता था। एक दिन माता सीता ने घर की सफाई करते समय उस धनुष को सहजता से उठाकर दूसरी जगह रख दिया। यह देखकर राजा जनक आश्चर्यचकित रह गए और उन्होंने संकल्प लिया कि जो वीर इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह किया जाएगा।
कथा के दौरान श्री श्री 108 अवधेश जी महाराज ने स्वयंवर प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि देश-विदेश के राजा-महाराजा स्वयंवर में पहुंचे, लेकिन कोई भी शिव धनुष को उठा नहीं सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे धनुष टूट गया और इसके बाद सीता-राम का विवाह संपन्न हुआ।
रामकथा मंच पर सीता-राम विवाह की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसमें राजा जनक, अयोध्या नरेश दशरथ और गुरु वशिष्ठ की भूमिका ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस दौरान प्रस्तुत संगीतमयी भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
कार्यक्रम का आयोजन समस्त ग्रामवासियों द्वारा किया जा रहा है। इस मौके पर आलोक सिंह (गोलू), दुखहरन सिंह, विजय बहादुर तिवारी, पिंटू सिंह, राजन सिंह, अस्पताली सिंह, पंकज सिंह, विद्या सिंह, बेचन पाण्डेय, रामवध सिंह, धीरज सिंह, नीरज सिंह, बब्बन बिंद, कैलाशपति सिंह, कृपा सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।