अर्नव चक्रवात का चंदौली में कहर, खेतों में बिछी धान की तैयार फसल
चंदौली। जिले में अर्नव चक्रवात का असर अब किसानों की फसलों पर दिखाई देने लगा है। तेज हवाओं और बारिश के चलते धानापुर विकासखंड क्षेत्र के नरहरपुर, वर्दी साडा समेत कई गांवों में किसानों की तैयार धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पककर कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर गिर गई है। इससे किसानों के सामने फसल बचाने और आर्थिक नुकसान की भरपाई की चिंता खड़ी हो गई है।
धानापुर क्षेत्र के वर्दी साडा गांव में भी चक्रवाती तूफान का व्यापक असर देखने को मिला है। गांव के किसान दीपक सिंह, वीरभान सिंह, सिरताज सिंह, राधेश्याम तिवारी, नंदकिशोर सिंह, पवन सिंह, श्रीराम तिवारी, सुरेंद्र गुप्ता, रोहित गुप्ता, सौरभ सिंह, ब्रजनिवास तिवारी, मुलायम यादव, अवधनिवास तिवारी, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव और संजय तिवारी समेत बड़ी संख्या में किसानों की फसल प्रभावित हुई है। किसानों के मुताबिक, धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार थी और कटाई की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसानों की परेशानी की कहानी केवल चक्रवाती तूफान तक सीमित नहीं है। धान की रोपाई के समय भी उन्हें मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ा था। बारिश नहीं होने के कारण किसानों को खेतों में पानी पहुंचाने के लिए महंगा डीजल खरीदकर निजी इंजन और पंपसेट चलाने पड़े। अतिरिक्त खर्च उठाकर किसी तरह रोपाई पूरी की और महीनों तक मेहनत करके फसल तैयार की। अब जब फसल पककर कटाई के लिए तैयार हुई तो आंधी, तूफान और बारिश ने किसानों की उम्मीदों को झटका दे दिया।
इस तरह किसानों को एक ही फसल में दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। रोपाई के समय सिंचाई पर अतिरिक्त लागत और अब कटाई के समय तैयार फसल के गिरने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। खेतों में गिरी धान की फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। उन्हें आशंका है कि समय पर कटाई और उचित देखभाल नहीं हो पाने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ सकता है।
उधर, किसानों की परेशानी को देखते हुए जिलाधिकारी चंदौली चंद्र मोहन गर्ग ने संबंधित अधिकारियों को फसलों के नुकसान का आकलन करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने स्वयं भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर फसलों का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि फसल क्षति का आकलन कराकर शासन की ओर से निर्धारित प्रावधानों के तहत राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल किसानों की निगाहें प्रशासन की सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हैं। अन्नदाताओं को उम्मीद है कि उनकी क्षति का निष्पक्ष आकलन होगा और उन्हें समय रहते उचित राहत मिल सकेगी।