वाराणसी में घेराव कार्यक्रम से पहले चंदौली में आजाद अधिकार सेना के जिला प्रभारी अजीत प्रताप सिंह को हाउस अरेस्ट करने का दावा

करणी सेना से संबंध नहीं, फिर भी हाउस अरेस्ट? अजीत प्रताप सिंह ने उठाए सवाल

 

चंदौली। वाराणसी में करणी सेना के प्रस्तावित मुख्यालय घेराव कार्यक्रम से पहले चंदौली में भी हलचल देखने को मिल रही है। आजाद अधिकार सेना के चंदौली जिला प्रभारी एवं बिहार के प्रदेश प्रभारी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अजीत प्रताप सिंह ने दावा किया है कि उन्हें उनके पैतृक गांव जमुनीपुर में पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर रखा है। हालांकि, इस कार्रवाई के संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाराणसी में करणी सेना के प्रस्तावित घेराव कार्यक्रम को देखते हुए चंदौली में भी पुलिस प्रशासन की गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच अजीत प्रताप सिंह को उनके गांव में रोके जाने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

 

करणी सेना से संबंध होने से किया इनकार

इस मामले में अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि उनका करणी सेना से कोई लेना-देना नहीं है और वह आजाद अधिकार सेना से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत अपने पैतृक गांव जमुनीपुर में पुलिस प्रशासन द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया है।

अजीत प्रताप सिंह ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की तानाशाही करार दिया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से लोगों के अधिकारों का हनन होता है।

प्रशासन की आधिकारिक जानकारी का इंतजार

वाराणसी में प्रस्तावित घेराव कार्यक्रम से पहले चंदौली में हुई इस घटनाक्रम को लेकर अब प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अजीत प्रताप सिंह को किस आधार पर और किस आदेश के तहत रोके जाने की कार्रवाई की गई है।

मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही कार्रवाई के कारणों और परिस्थितियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम और उससे पहले की प्रशासनिक गतिविधियों पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।