खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेताओं पर कृषि विभाग सख्त, भंडारण मानकों का पालन अनिवार्य

गोदामों में सुरक्षा उपकरण, अग्निशमन यंत्र और अपडेट रजिस्टर रखना जरूरी, जिला कृषि अधिकारी ने दिए निर्देश
 

चंदौली । जनपद जिले में उर्वरक, कीटनाशी और बीज उत्पादों के सुरक्षित भंडारण एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने जनपद के सभी विनिर्माताओं, सीएंडएफ एजेंटों, थोक एवं फुटकर विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठानों और गोदामों में निर्धारित मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध संबंधित अधिनियमों एवं नियंत्रण आदेशों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

जिला कृषि अधिकारी ने निर्देश दिया कि उर्वरक, कीटनाशी और बीज उत्पादों को जमीन पर रखने के बजाय लकड़ी, लोहे या प्लास्टिक के पैलेट पर रखा जाए। उत्पादों को दीवारों से सटाकर रखने से भी बचना होगा, ताकि नमी के कारण उनकी गुणवत्ता प्रभावित न हो। इसके साथ ही उर्वरक, कीटनाशी और बीजों को अलग-अलग गोदामों में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। विभाग के अनुसार, एक ही स्थान पर इन उत्पादों के भंडारण से कीटनाशकों का प्रभाव अन्य उत्पादों पर पड़ सकता है, जिससे फसल उत्पादन और किसानों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।

गोदामों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। प्रतिष्ठान संचालकों को मास्क, गमबूट, दस्ताने और सुरक्षा चश्मे जैसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने तथा उनके नियमित उपयोग को सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं, आग से बचाव के लिए गोदाम की क्षमता के अनुरूप पर्याप्त अग्निशमन यंत्र रखना अनिवार्य होगा। गोदामों में उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था करने और आवश्यकता के अनुसार एग्जॉस्ट लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

विभाग ने गोदामों के मुख्य द्वार पर फर्म का नाम, पता, मोबाइल नंबर और लाइसेंस संख्या अंकित करने के साथ 'ग्रो सेफ फूड' पोस्टर प्रदर्शित करने को कहा है। इसके अलावा, गोदाम में उपलब्ध उर्वरक, कीटनाशी और बीज उत्पादों को श्रेणीवार एवं उत्पादवार व्यवस्थित ढंग से रखना होगा, ताकि निरीक्षण के दौरान वास्तविक स्टॉक का अभिलेखों से मिलान किया जा सके। संबंधित कंपनियों के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट (पीसी) और लाइसेंस की प्रति भी प्रतिष्ठान पर उपलब्ध रखनी होगी।

एक्सपायरी, लीकेज या क्षतिग्रस्त उत्पादों के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे उत्पादों को अलग स्थान पर रखकर उस पर 'एक्सपायरी/लीकेज/डैमेज उत्पाद' और 'Not for Sale' अंकित करना होगा। इनके स्टॉक का उत्पादवार विवरण नियमित रूप से अपडेट करने और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया है।

जिला कृषि अधिकारी ने सभी विक्रेताओं को स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, अवसान पंजिका और बिल पंजिका सहित आवश्यक अभिलेख प्रतिदिन अपडेट रखने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रारूपों में अभिलेखों का अवलोकन कराने के साथ स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कराना होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद के सभी संबंधित प्रतिष्ठान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश-1985, कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं नियमावली-1971, बीज नियंत्रण आदेश-1983 तथा बीज अधिनियम-1966 के प्रावधानों के अनुरूप ही भंडारण और क्रय-विक्रय करें। निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।