10 हजार किसान उत्पादक संगठन बनने के बाद भी बड़ा सवाल- किसानों को मिला क्या?

 

देश में 10 हजार किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन का लक्ष्य पूरा हो चुका है। वहीं, 31 जुलाई 2026 तक इन संगठनों का संचयी कारोबार 20,358 करोड़ रुपये बताया गया है। सरकार की इस योजना का उद्देश्य किसानों को सामूहिक रूप से मजबूत करना, खेती की लागत कम करना और उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है। लेकिन इन उपलब्धियों के बीच अब किसानों को मिलने वाले वास्तविक लाभ पर सवाल उठने लगे हैं।

किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज की सामूहिक खरीद, फसल का संग्रह, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए सरकार की ओर से प्रबंधन सहायता, इक्विटी अनुदान और ऋण गारंटी जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। इसके बावजूद सवाल है कि कितने किसान वास्तव में अपने FPO के माध्यम से कारोबार कर रहे हैं और कितनों को इसका आर्थिक फायदा मिल रहा है?

तेजस्वी संगठन न्यास के संस्थापक ई. प्रकाश पाण्डेय ने FPO की कार्यशैली और जमीनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल संगठन बनाना और शेयरधारकों की संख्या बढ़ाना सफलता नहीं है। असली सफलता तब होगी, जब किसान अपनी उपज संगठन को बेचे, उसे बाजार से बेहतर मूल्य मिले और उसकी खेती की लागत कम हो।

उन्होंने CBBO की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इन संगठनों की जिम्मेदारी केवल FPO का गठन और प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें एक मजबूत और आत्मनिर्भर व्यवसाय के रूप में विकसित करना भी है। ऐसे में अब संगठनों का स्वतंत्र मूल्यांकन होना चाहिए, ताकि सक्रिय, कमजोर और निष्क्रिय FPO की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ई. प्रकाश पाण्डेय के मुताबिक, अब सरकार को नए संगठन बनाने के साथ-साथ पुराने संगठनों की कार्यक्षमता सुधारने पर भी ध्यान देना चाहिए। FPO की सफलता का आकलन कारोबार, किसान भुगतान, लागत बचत, प्रसंस्करण और किसानों को हुए प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ के आधार पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठन की असली सफलता सरकारी आंकड़ों में नहीं, बल्कि किसान की आय और आर्थिक स्थिति में दिखाई देनी चाहिए। ऐसे में 10 हजार FPO और हजारों करोड़ रुपये के कारोबार के बीच सबसे बड़ा सवाल आज भी कायम है-आखिर किसान को मिला क्या?

-ई. प्रकाश पाण्डेय, संस्थापक, तेजस्वी संगठन न्यास